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कांग्रेस में नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए मचा बवाल, असली वजह तो कुछ और है

Tue, 16 May 2017 03:34 PM IST
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा
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कांग्रेस पार्टी में नए अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए बवाल मच गया है, वहीं इसके पीछे की असली वजह तो कुछ और ही बताई जा रही है। सोमवार को कांग्रेस की मेंबरशिप फार्म जमा करवाने की अंतिम तारीख थी लेकिन छाबड़ा गुट की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी गुट के करीबियों की सक्रिय मेंबरशिप की प्रति मंजूर नहीं की गई। इस कारण कांग्रेस भवन में हंगामा भी हुआ। सेक्टर-35 के कांग्रेस भवन में देर शाम तक फार्म की प्रतियां भरी गईं।
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छाबड़ा गुट का कहना है कि उन नेताओं के फार्म मंजूर नहीं किए गए हैं जिन्होंने चुनाव में पार्टी के खिलाफ काम किया है।  तिवारी गुट के पूर्व चंद्रमुखी शर्मा, उनके भाई सूरजमुखी शर्मा की मेंबरशिप की कापियां लेने से मना कर दिया गया जिसकी इन नेताओं ने पीआरओ एवं पूर्व सांसद मूल चंद मीणा को शिकायत भी की है। सूरजमुखी शर्मा ने वार्ड नंबर-1 से कांग्रेस उम्मीदवार एचएस लक्की के खिलाफ  निर्दलीय उम्मीदवार के तौर नगर निगम चुनाव लड़ा था।

चुनाव के बाद कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा ने पूर्व पार्षद चंद्रमुखी शर्मा को भी पार्टी से बाहर निकाल दिया था। जबकि चंद्रमुख्री शर्मा का कहना है कि उन्होंने पार्टी के खिलाफ कोई काम नहीं किया है और न ही उनके पास पार्टी से निकालने की कोई लेटर अभी तक आई है। इसी तरह मंजीत सिंह को भी सदस्यता फार्म भरने के लिए कापियां भी नहीं दी गई क्योंकि वे बीते चुनाव में पलसौरा से टिकट न मिलने पर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था।
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इसके पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निकाल दिया गया था। जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने अपनी मेंबरशिप की कापियां सेक्टर-35 भवन में जमा करवाई है। सक्रिय सदस्य बनने के लिए नेता को कम से कम एक कापी भरनी जरूरी है। हर कापी में 25 प्राइमरी सदस्य बनाने भी जरूरी है। जबकि एक नेता एक से ज्यादा कापियां भी भर सकता है।

 
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इस बार चुनाव होने की है उम्मीद

चंडीगढ़ कांग्रेस - फोटो : अमर उजाला
हालांकि साल 1972 के बाद अध्यक्ष पद के लिए चुनाव सर्वसम्मति से हुआ है लेकिन इस बार सीनियर नेताओं में भारी गुटबाजी है। बंसल और छाबड़ा गुट से उनके अपने नेता भी नाराज है इसलिए इस बार मतदान की प्रक्रिया द्वारा नया अध्यक्ष बनने की संभावना है। अभी तक युवा कांग्रेस के अध्यक्ष और प्रदेश कार्यकारिणी का चुनाव ही मतदान से होता है ऐसे में चंडीगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष का चुनाव मतदान होने से आगे टकराव ज्यादा बढ़ेगा।

असल में लोकसभा टिकट की है लड़ाई
चंडीगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर कब्जा करके गुट दो साल बाद होने वाले  लोकसभा चुनाव में पार्टी की टिकट हासिल करना चाहते है। जबकि पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल चंडीगढ़ से 5 बार चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन अब पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी भी टिकट के लिए शहर से दावेदार बन गए हैं।

मेंबरशिप की कापियां सभी की मंजूर करने के लिए कहा गया है। पार्टी यह बाद में जांच करेगी कि किस नेता को पार्टी से निकाला गया है और किसने चुनाव में पार्टी के खिलाफ काम किया है। लेकिन कापियां सभी की ली जाएगी। मंगलवार को एपीआरओ चंडीगढ़ पहुंच जाएंगे।
- मूल चंद मीणा, पीआरओ एवं पूर्व सांसद

पार्टी के खिलाफ काम करने वालों को हाईकमान की मंजूरी से निकाला गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी की मेंबरशिप की कापी ली गई है। 15 अक्तूबर तक चुनाव प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
- प्रदीप छाबड़ा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
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