वाल्मीकि समुदाय और सवर्ण पक्ष के बीच हुए झगड़े के बाद मंगलवार को मिर्चपुर गांव से 40 दलित परिवार पलायन कर हिसार आ गए। प्रशासनिक अधिकारियों की दिनभर की मशक्कत के बावजूद पीड़ित लोग गांव में रहने को राजी नहीं हुए। प्रशासन की दो बार की वार्ता विफल होने के बाद देर रात हिसार स्थित जीओ मैस में पीड़ितों की राज्य मंत्री कृष्ण बेदी से बातचीत करवाई गई। इस दौरान मांगें पूरी किये जाने के आश्वासन पर दलितों ने वापस गांव लौटने का निर्णय किया। इन लोगों को मिर्चपुर छोड़ने के लिए प्रशासन ने तत्काल रोडवेज की बसे मंगवाई।
वाल्मीकि समुदाय के 40 परिवारों के करीब 130 लोगों ने जाति विशेष से जान का खतरा होने की आशंका जताकर सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पैदल ही गांव से पलायन कर दिया था। प्रशासनिक अधिकारियों ने उनको मनाने की काफी मशक्कत की, लेकिन वे नहीं माने और हिसार में जिला उपायुक्त कार्यालय पर डेरा डालने का निर्णय लेकर हिसार रवाना हो गए।
प्रशासन से मामला संभलता ने देख देर रात राज्य मंत्री मंत्री कृष्ण कुमार बेदी को पीड़ित परिवारों से बातचीत के लिए भेजा गया। वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने उनके सामने भी अपनी मांगे दोहराईं। देर रात तक हिसार स्थित जीओ मैस में सरकार और पीड़ित पक्ष के बीच वार्ता चल रही थी। पुलिस ने इस मामले में 17 नामजद सहित अनेक युवकों के खिलाफ मामला दर्ज कर तीन को गिरफ्तार कर लिया है।
कृष्ण कुमार बेदी से पीड़ित परिवारों की लंबी बातचीत
हिसार के मिर्चपुर में दलितों और जाटों के बीच टकराव
- फोटो : File Photo
वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने मंगलवार सुबह पंचायत बुलाई और इसके बाद 40 परिवारों ने अपने घरों को छोड़कर पैदल ही हिसार जाने का निर्णय लिया। करीब 130 लोग सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए गांव से पलायन कर गए।
उनको मनाने के लिए पुलिस के अधिकारियों ने गांव के पास ही उनसे बातचीत की, लेकिन वो नहीं माने। इस पर उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया तो हिसार से एसडीएम अशोक बंसल को मामले को निपटाने की जिम्मेवारी सौंपी गई। मिर्चपुर से दो किलोमीटर दूर गांव किन्नर के पास प्रशासनिक अधिकारियों ने वाल्मीकि समुदाय के लोगों के साथ बातचीत शुरू की। इस दौरान उन्होंने प्रत्येक परिवार को रोजगार, घायलों को 50-50 हजार रुपये का मुआवजा, प्रत्येक परिवार को 25-25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता व हिसार शहर के आसपास पुनर्वास की सुविधा मुहैया करवाने और हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग रखी।
एसडीएम बंसल ने जिला उपायुक्त से फोन पर बातचीत की। लेकिन वार्ता सिरे नहीं चढ़ने पर बाद खेड़ी चौपटा पर फिर बातचीत की गई। इसके बाद प्रशासन ने उनके लिए रोडवेज की बस भेजी और सभी लोगों को उपायुक्त कार्यालय के सामने छोड़ने की बात कहकर जीओ मैस में लाया गया। यहां दलितों की राज्य मंत्री कृष्ण बेदी से बातचीत करवाने की बात कही तो वे इसके लिए राजी हो गए।