मुख्यमंत्री मनोहर लाल, मंत्री अनिल विज
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निकाय चुनाव में चेयरमैनी के सीधे चुनाव को लेकर हरियाणा सरकार और शहरी स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज के सुर अलग-अलग हैं। मुख्यमंत्री ने जहां इस मामले को सर्वसम्मति से लिया फैसला बताया है। वहीं विज ने इस पूरे मामले को लेकर आज फिर बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस विषय में कैथल में बयान दिया है पार्टी में फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।
यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया फैसला है। जिसके बाद विज का बयान आया है कि यह बात ठीक है कि यह फैसला सामूहिक तौर पर लिया गया था, लेकिन अगर कोई फैसला गलत लिया गया है तो उस पर पुनर्विचार करना ही प्रजातंत्र का हिस्सा है। इसलिए मुझे ऐसा लगता है कि सीधे चुनाव करवाना ठीक नहीं है। तभी मैंने फाइल पर लिखा है। मेरी अब भी यह राय है कि इस मामले पर एक बार फिर विचार होना चाहिए।
मालूम हो कि शहरी स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज ने चेयरमैनी के चुनाव सीधे करवाने संबंधी फाइल पर यह लिख दिया था कि वे सीधे चुनाव करवाने के हक में नहीं है। हालांकि प्रदेश में डायरेक्ट चुनाव से पांच जिलों में मेयर बने हुए एक साल हो चुका है। अब इस मामले में ताजा हालात यह हैं कि विधानसभा में विधेयक पास होने के बाद इंप्लीमेंटेशन के लिए यह फाइल अनिल विज के पास गई थी।
पिछली सरकार में इस विभाग की मंत्री कविता जैन थीं। जबकि वर्तमान सरकार में अनिल विज महकमे के मंत्री है। विज ने फाइल पर यह टिप्पणी कर दी कि यह संविधान के मुताबिक नहीं है। लिहाजा चुनाव पुरानी पद्धति पर होने चाहिए। उन्होंने फाइल पर यह भी लिखा कि यदि यह व्यवस्था बनानी है तो शीर्ष स्तर पर बनानी चाहिए।