बढ़ी कीमतों के बाद नो प्रॉफिट-नो लॉस पर प्याज बेचने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन को सस्ते प्याज नहीं मिल पा रहे हैं। इसके लिए प्रशासन ने अब नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया से गुहार लगाई है। केंद्र सरकार ने तुर्की से प्याज आयात किया है, जिसमें से चंडीगढ़ को भी भेजा जा सकता है। इसलिए यूटी प्रशासन सस्ते प्याज के लिए तुर्की के प्याज की आस लगाए बैठा है।
इसके अलावा प्याज को लेकर मचे हाहाकार और कालाबाजारी की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन गंभीर हो गया है। प्याज की कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर अंकुश लग सके, इसके लिए प्रशासन ने शुक्रवार को प्याज की स्टॉक लिमिट को लेकर विशेष एडवाइजरी जारी की है। जारी आदेश के तहत थोक व्यापारी, सेलिंग एजेंट और वितरण एजेंट को 25 मीट्रिक टन और फुटकर व्यापारियों को 5 मीट्रिक टन प्याज स्टॉक करने की छूट दी गई है। प्रशासन ने व्यापारियों को तय लिमिटसे अधिक प्याज स्टॉक न करने के निर्देश दिए हैं। अगर कहीं कोई गड़बड़ी की शिकायत मिली तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही प्रशासन की तरफ से सभी एसडीएम, एसएचओ, फूड सप्लाई इंस्पेक्टर, मंडी सुपरवाइजर और मार्केटिंग सुपरवाइजर को चंडीगढ़ में प्याज के भंडारों की चेकिंग के निर्देश दिए गए हैं। प्याज के शहर में आने और मार्केट में उसकी स्थिति का रिकॉर्ड मेंटेन करने के लिए भी कहा गया है।
सस्ते प्याज के स्टॉल लगेंगे, लेकिन कब?
बीते दिनों चंडीगढ़ प्रशासन ने प्याज की बढ़ी कीमतों के बाद सस्ते दर पर प्याज बेचने का फैसला लिया था। लेकिन ये स्टॉल कब लगेंगे, इसको लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। शहरवासी प्याज की बढ़ी कीमतों से त्रस्त हैं, लेकिन प्रशासन स्टॉल लगाने में देरी कर रहा है। हालांकि प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि वह 60 से 65 रुपये प्रति किलों के बीच प्याज बेचेंगे, लेकिन ये स्टॉल लगेंगे कब, यह नहीं बताया है। गौरतलब है कि सितंबर में प्याज के दामों में जब एकाएक बढ़ोतरी हुई तो प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने अधिकारियों को सस्ते दरों (32 रुपये प्रति किलो) पर लोगों को प्याज उपलब्ध कराने के आदेश जारी किए थे। हर व्यक्ति को आधार कार्ड देखकर दो किलो प्याज दिया गया। रोजाना करीब 10 क्विंटल प्याज बेचे जाते थे। प्रशासन की इस पहल को शहरवासियों से काफी अच्छा रिस्पांस मिला था।