शुभांकर की इस उपलब्धि से ट्राइसिटी के गोल्फ खिलाड़ियों में खुशी का माहौल है। शुभांकर शर्मा चंडीगढ़ गोल्फ क्लब में टूर्नामेंट में हिस्सा लेते हैं। वहीं, चंंडीगढ़ गोल्फ रेंज में अभ्यास भी करते हैं। अपने पहले ओलंपिक का टिकट हासिल करने के बाद शुभांकर शर्मा ने कहा कि ओलंपिक में भारत का नेतृत्व करना मेरे लिए गर्व की बात है। यह मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। मैं हमेशा से ही ओलंपिक में भारतीय टीम का हिस्सा बनना चाहता था। शर्मा ने कहा पेरिस ओलंपिक में भारतीय टीम में मेरे साथ पंजाब के अनुभवी गोल्फर गगनजीत भुल्लर, अदिति और दीक्षा भी हैं। हमारी टीम काफी मजबूत है। हमने पिछले कई टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन किया है, जिसका फायदा हमें ओलंपिक में मिल सकता है।
जिस स्टार प्लेयर के पिता ने खेलने की सलाह दी, उन्हें ही पीछे छोड़ा : शुभांकर शर्मा के गोल्फर बनने की कहानी दिलचस्प है। दरअसल, शुभंकर के पिता एमएल शर्मा और स्टार गोल्फर अनिर्बान लाहिड़ी के पिता डॉ. तुषार सेना में साथ थे। शुभांकर जब सात साल के थे, तब अनिर्बान के पिता ने उन्हें गोल्फ खेलने की सलाह दी। शुभांकर और उसके पिता को सलाह अच्छी लगी। शुभांकर ने उसी साल से गोल्फ खेलना शुरू कर दिया और 2018 में देश के नंबर-1 गोल्फर बन गए। खास बात यह है कि शुभांकर, अनिर्बान लाहिड़ी को पीछे छोड़ते हुए कर शीर्ष स्थान पर पहुंचे। अब शुभांकर देश के पहले और अनिर्बान नंबर-2 गोल्फर हैं। वर्ल्ड रैंकिंग में शुभांकर 66वें और अनिर्बान 80वें नंबर पर हैं।