सिटी ब्यूटीफुल के लिए वर्ष 2013 साहित्य नगरी बनकर उभरा। सिटी में साहित्य की गंगा ऐसी बही कि सबने डुबकी लगाई। यहां साहित्य का मंथन भी हुआ और साहित्यकारों के दर्शन भी। उनके विचारों ने सिटी के साथ ही देश के साहित्य को एक नई दिशा दिलाने में भूमिका निभाई।
चंडीगढ़ लिट्रेचर फेस्टिवल के साथ ही सिटी में एक नई शुरुआत भी हुई। अदब फाउंडेशन द्वारा आयोजित किए गए इस फेस्टिवल में बालीवुड के निर्देशक भी आए और प्रोड्यूसर भी। अशोक वाजपेयी जैसे साहित्यकार भी पहुंचे।
फिल्म बीए पास की शिल्पा शुक्ला जैसी स्टार यहां पहुंचीं। चंडीगढ़ में लिट फेस्ट का आयोजन भी किया गया और नेशनल बुक ट्रस्ट दरा चंडीगढ़ बुक फेयर का आयोजन भी हुआ।
यह आयोजन साहित्य के संग ही सिटी को नई दिशा देने में कामयाब रहे। चंडीगढ़ लिट्रेचर फेस्टिवल के आयोजक मितुल दीक्षित ने कहा कि चंडीगढ़ में कल्चरल एक्टिविटी हैं और साहित्य से जुड़ाव भी है।
चंडीगढ़ लिट्रेचर फेस्टिवल का आयोजन इन बातों को कुछ आगे ले जाना रहा। पुस्तक मेले ने सिटी को नए रचनाकारों के साथ रू-ब-रू करवाया।
सिटी में रिलीज पर रिलीज
चंडीगढ़ में कई नई फिल्मों की रिलीज हुई। पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में बालीवुड की इंट्री का नया इतिहास चंडीगढ़ से ही लिखा गया।
गोविंदा, शक्ति कपूर, अक्षय कुमार, धमेंद्र, सुभाष घई जैसे बालीवुड स्टार्स ने पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में इंट्री का बिगुल बजाया। सुभाष घई ने डबल द ट्रवल की घोषणा की।
चंडीगढ़ में शूटिंग का भी जलवा रही। जिसमें मेरे डैड की मारुति, सन आफ सरदार, बेशर्म, पाजी इन प्राब्लम, लक्की दी अनलक्की स्टोरी की शूटिंग यहां की गई। मुक्ता आर्ट के प्रतिनिधि राज जुनेजा ने कहा कि सिटी की लोकेशन बेहतरीन हैं और आने वाले समय में यहां ज्यादा फिल्मों की शूटिंग होंगी।
मनीष वालिया प्रोडक्शन के मनीष ने कहा कि चंडीगढ़ अब फिल्मों के लिए हाट स्पाट बन गया है चाहे हीरोइन की तलाश हो या फिर आडीशन की। यहां लोकेशन भी खूब हैं।