अब ड्राइविंग टेस्ट में सिफारिश नहीं चलेगी और न ही रिश्वत। डीएल बनवाने के लिए अब ड्राइविंग टेस्ट पहले से कठिन होगा। बेशक, अब पक्का लाइसेंस बनवाने के लिए ड्राइविंग टेस्ट पहले से मुश्किल होगा, लेकिन आपको किसी सिफारिश या बाबुओं की जी हजूरी और रिश्वत नहीं देनी पड़ेेगी। पक्का लाइसेंस बनवाने के लिए हाईटेक ट्रैक पर ड्राइविंग टेस्ट देना होगा।
अब लाइसेंसिंग आफिसर एक कंट्रोल रूम में बैठकर हाईटेकभनोलॉजी वाले इस ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर नजर रख सकेेंगे। इस हाईटेक ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर सेंसर, स्पीड वाउचर और सीसीटीवी इंस्टाल किए गए हैं। ये टेस्ट के दौरान वाहन चालक की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर नजर रखेंगे। अब आपके ड्राइविंग लाइसेंस को तभी मंजूरी मिलेगी, जब आप कंप्यूटराइज्ड ड्राइविंग टेस्ट पास कर लेंगे।
सेक्टर-23 के चिल्ड्रन ट्रैफिक पार्क को पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड कर दिया गया है। ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर हाईटेक सेंसर लगाए गए हैं। जोकि गाड़ी की स्पीड से लेकर हर एक मूवमेंट पर नजर रखेंगे। अब पेड़ के नीचे कुर्सी पर बैठकर लाइसेंसिंग आफिसर ड्राइविंग टेस्ट लेते नजर नहीं आएंगे बल्कि कंट्रोल रूम में इस हाईटेक ट्रैक को कं ट्रोल किया जाएगा। जहां पर व्हीकल इंस्पेक्टर कंट्रोल रूम में बैठकर कंप्यूटर व सीसीटीवी व सेंसर की मदद से आपके ड्राइविंग स्किल्स पर नजर रखेंगे। यूटी के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ रोड ट्रांसपोर्ट की मदद से ड्राइविंग टेस्ट के लिए जो हाईटेक ट्रैक तैयार किया है, उस पर 20 हाईटेक कै मरा लगाए गए हैं, जोकि ड्राइविंग टेस्ट के दौरान ड्राइवर व गाड़ी की हर एक मूवमेंट पर नजर रखेगा। ये हाईटेक कै मरे सीधे कंट्रोल रूम से कनेक्ट किए गए हैं। जहां लाइसेंसिंग अथॉरिटी या व्हीकल इंस्पेक्टर कंप्यूटर पर बैठकर पूरे ड्राइविंग टेस्ट पर कंट्रोल रखेंगे।
20 नवंबर से शुरू होगा सिस्टम
RLA Chandigarh
- फोटो : File Photo
लाइसेंसिंग अथॉरिटी नहीं अब कंप्यूटर की चलेगी
पहले सिफारिशों के चलते लाइसेंसिंग अथॉरिटी या इंस्पेक्टर अपने जान पहचान के चलते कई लोगों का ड्राइविंग टेस्ट फेल होने के बावजूद पास कर देते थे, लेकिन ड्राइविंग टेस्ट पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड होने से अब किसी की नहीं चलेगी। दरअसल, अब जो भी एप्लीकेंट ड्राइविंग टेस्ट देगा, उसे कंप्यूटराइज्ड रिपोर्ट मिल जाएगी। ड्राइविंग टेस्ट के दौरान एप्लीकेंट ने कहां-कहां गलती की ट्रैक पर लगे सेंसर व हाईटेक कैमरा एप्लीकेंट की इन गलतियों को फौरन कैप्चर कर कंट्रोल रूम में लगे मॉनीटर सिस्टम पर भेज देगा। कंप्यूटराइज्ड रिपोर्ट ओके होने पर ही लाइसेंस मिल सकेगा। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की ओर से इनोवेटिव ड्राइविंग टेस्ट सिस्टम चिल्ड्रन ट्रैफिक पार्क के ट्रैक पर इंस्टाल हो चुका है। अगले हफ्ते सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ रोड ट्रांसपोर्ट की ओर से इसका ट्रायल लिया जाएगा।
चंडीगढ़ प्रशासन और सीआईआरटी के बीच हुआ एमओयू
चंडीगढ़ प्रशासन और सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ रोड ट्रांसपोर्ट के बीच वीरवार को एमओयू हुआ। प्रशासन ने पुणे के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट को बतौर कंसल्टेंट हायर कर लिया है। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट का मानना है कि इस प्रक्रिया से प्रशासन को तो फायदा होगा ही साथ ही लोगों के लिए भी यह सुविधा होगी।
20 नवंबर से शुरू होगा सिस्टम
ड्राइविंग टेस्ट के लिए सेक्टर-23 के चिल्ड्रन ट्रैफिक पार्क में इनोवेटिव ड्राइविंग टेस्ट सिस्टम इंस्टाल हो चुका है। पुणे की सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट को कंसल्टेंट ने आईडीटीएस सिस्टम इंस्टाल कर दिया है। अगले हफ्ते पुणे की सीआईआरटी की ओर से यूटी प्रशासन के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट को इसका ट्रायल दिया जाएगा।
20 कैमरे व 50 सेंसर ट्रैक पर लगाए गए
ट्रैक पर 20 कैमरे और 50 के करीब सेंसर लगाए गए हैं। सर्वर और ट्रैकिंग कैमरे आपस में कनेक्ट किए गए हैं। इन हाईटेक कैमरों के जरिए ट्रैक पर चल रही गाड़ी का रिकॉर्ड सर्वर से कंप्यूटर में भेज दिया जाएगा। सिस्टम एप्लीकेंट का पूरा टेस्ट रिकॉर्ड और डाटा सेव करेंगे। जो पैमाने तय किए गए हैं, उसी के आधार पर ड्राइविंग स्किल्स जांची जाएंगी।
ड्राइविंग टेस्ट अब पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड होगा। इसमें किसी की सिफारिश नहीं चलेगी। पक्का लाइसेंस बनवाने के लिए हाईटेक ट्रैक पर ड्राइविंग टेस्ट देना होगा। पारदर्शी प्रक्रिया से लाइसेंस जारी किए जाएंगे।
-कैप्टन करनैल सिंह, आरएलए