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CII सेशनः 'विश्व बाजार में भारतीय कंपनियों के लिए अपार संभावनाएं'

Thu, 02 Jun 2016 07:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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बिजनेस को लेकर चंडीगढ़ सीआईआई का इंटरेक्टिव सेशन - फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ सीआईआई में आयोजित इंटरेक्टिव सेशन में आस्ट्रेलिया, यूरोपियन यूनियन, बेल्जियम तथा लक्सेमबर्ग के भारत मिशन प्रमुखों ने व्यापार की संभावनाओं पर बातचीत की। उन सभी का कहना है कि भारतीय उद्योगों को विश्व प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढलने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय सामाजिक मूल्यों को आत्मसात करना होगा।
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पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के सचिव अनिरुद्ध तिवारी ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार के लिए विदेशी प्रतिनिधिमंडल स्थानीय सहयोग के लिए सरकार को अप्रोच कर रहे हैं और इससे व्यापार का क्षेत्र और अधिक विस्तृत हो रहा है। उन्होंने कहा कि इंटरेक्टिव बिजनेस दोनों पक्षों को जीत का समान अवसर देता है।

पंजाब सरकार का उद्योग विभाग सीआईआई के इनवेस्ट नार्थ मिशन के साथ ही निवेश की संभावनाओं को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार उत्तरी क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए इस दिशा में आने वाली सभी समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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आस्ट्रेलिया में भारत के हाईकमिश्नर नवदीप सिंह सूरी ने कहा कि आस्ट्रेलिया विश्व की 12वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जो 12 ट्रिलियन डॉलर की है। सर्विस पर आधारित होने के कारण इस देश की अर्थव्यवस्था ने पिछले 26 साल में मंदी का दौर नहीं झेला है। हालांकि आस्ट्रेलिया एक विकसित देश है और भारत एक विकासशील देश, लेकिन जब दोनों देशों के व्यापार के आंकड़ों की तुलना की जाती है तो ऐसा बिलकुल नहीं लगता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि भारतीय कंपनियों को अब सर्विस के क्षेत्र में काम करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। क्योंकि आस्ट्रेलिया की 76 प्रतिशत कंपनियां इसी क्षेत्र में काम कर रही हैं। स्किल डेवलपमेंट, वोकेश्नल ट्रेनिंग, वाटर मैनेजमेंट, संरक्षण तकनीक, फूड प्रोसेसिंग व पैकेजिंग आदि क्षेत्रों में काम कर भारतीय कंपनियां इसका आस्ट्रेलिया में लाभ उठा सकती हैं।

जनरल मोटर्स व टोयोटा जैसी बड़ी कंपनियां आस्ट्रेलिया से बाहर जा रही हैं और ऑटो कॉम्पोनेंट उद्योग संघर्ष के दौर से गुजर रहा है ऐसे में भारतीय कंपनियां इसे सुनहरे मौके के तौर पर भुना सकती हैं।

भारत को आस्ट्रेलिया की आवश्यकताओं का अध्ययन करना चाहिए जिससे ग्रीन फील्ड और ब्राउन फील्ड दोनों के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट क्षेत्र में निवेश कर सकें। भारत की कंपनियों को आस्ट्रेलिया की रिसर्च एजेंसियों द्वारा बनाई गई विकसित तकनीकों का लाभ उठाना चाहिए, क्योंकि आस्ट्रेलिया अभी तक इनका कॉमर्शियलाईजेशन नहीं कर पाया है।

आस्ट्रेलिया के क्वीनलैंड संस्थान ने सूखा प्रतिरोधी दाल और चने की विभिन्न किस्में तैयार की हैं जो भारत के महाराष्ट्र जैसे सूखा प्रभावित राज्यों के लिए मददगार साबित हो सकती हैं। यूरोपियन यूनियन, बेल्जियम व लक्सेमबर्ग में भारत के अंबेसडर मंजीव सिंह पुरी ने कहा कि यूरोपियन यूनियन (ईयू) सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और साथ ही भारत में सबसे बड़ी एफडीआई व एफपीआई है।

ईयू से ट्रेड रिलेशन का लाभ लेने के लिए भारतीय कंपनियों को विश्व स्तर के गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि चावल की बासमती किस्म, सब्जियों और मिल्क प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता में सुधार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत से ईयू को होने वाले एक्सपोर्ट का 20 प्रतिशत हिस्सा चावल का है और ऐसे में इसे बनाए रखने के लिए भारतीय कंपनियों को गुणवत्ता की ओर ध्यान देने की जरूरत है।

ईयू के साथ अपने व्यापारिक रिश्तों को मजबूत रखने के लिए सामाजिक मूल्यों जैसे लेबर स्टैंडर्ड, मानवाधिकार आदि के क्षेत्र में कार्य करना बेहद जरूरी है, क्योंकि संरक्षणवादी सोच के साथ ईयू के साथ लंबे समय तक रिश्ते बरकरार नहीं रखे जा सकते हैं।
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