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CII एग्रोटेक का समापन, युवाओं ने किसानों को दिए कई तकनीकी सुझाव

Wed, 23 Nov 2016 01:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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CII एग्रोटेक का समापन - फोटो : अमर उजाला
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 कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज की ओर से आयोजित चार दिवसीय सीआईआई एग्रोटेक-2016 मंगलवार को संपन्न हो गया। पंजाब के राज्यपाल बीपी सिंह बदनौर समापन समागम के मुख्य मेहमान थे। उन्होंने कृषि क्षेत्र के लिए प्रभावशाली तकनीक के विकास को इंडस्ट्री, शिक्षाविदों और किसानों की साझेदारी पर जोर दिया। समागम में हरियाणा के कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने भी शिरकत की।
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राज्यपाल बदनौर ने कहा कि कृषि क्षेत्र में पंजाब बेहतर काम कर रहा है। हालांकि घटता जलस्तर, रसायनों का अधिक प्रयोग, मिट्टी की घटती उपजाऊ शक्ति और पराली जलाने जैसी गंभीर चुनौतियां पेश आ रही हैं। पंजाब सरकार इनके प्रति सचेत है। सरकार मक्का, कपास, बासमती और सोयाबीन को बढ़ावा दे रही है। सरकार ने मार्केटिंग और प्रोसेसिंग पर टैक्स दरों को तर्कसंगत बनाया है। किसानों को कृषि केअन्य हित धारकों के साथ कनेक्ट करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सीआईआई के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी प्रदर्शनियों से किसान काफी लाभान्वित होते हैं।

 सीआईआई उत्तरी क्षेत्र की चेयरपर्सन रुमझुम चटर्जी ने कहा कि एग्रोटेक में खेती और सहयोगी सेक्टर केसभी पहलुओं को शामिल किया गया। इनमें फार्म टेक, बेहतर जमीन, उन्नत प्रौद्योगिकी पैवेलियन, पशुधन एक्सपो, फूड टेक, जल प्रबंधन व सिंचाई शामिल हैं। 69 माहिरों ने सत्रों को संबोधित किया, पांच सौ से ज्यादा प्रतिभागी शामिल हुए। चार देशों की ओर से विशेष सत्र आयोजित किए गए।
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पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के किसान संगठनों के दल आए। पंजाब स्टेट काउंसिल के वीसी गुरमीत भाटिया ने कहा कि एग्रोटेक के नतीजे शिक्षाविदों, इंडस्ट्री व नीति निर्माताओं के लिए उपयोगी होंगे। अगला संस्करण 1-4 दिसंबर-2018 में आयोजित किया जाएगा। समागम में भागीदार देशों जर्मनी व कनाडा, अतिथि देश ग्रेट ब्रिटेन, सहयोगी राज्य गुजरात व मध्य प्रदेश के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। शानदार पैवेलियन बनाने वालों को भी अवार्ड दिए गए।
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चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी समाधान भी सुझाए

- फोटो : अमर उजाला
कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) की ओर से आयोजित एग्रोटेक-2016 के अंतिम दिन एगहैक के तहत चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं ने शिरकत की। चर्चा सत्र के दौरान सामने आया कि आज का युवा खेती को लेकर क्या सोच रहा है और उसका क्या दृष्टिकोण है। युवाओं ने कृषि तकनीकों को विकसित करने के लिए अपना दृष्टिकोण पेश किया। साथ ही खेती को लेकर सामने आ रही चुनौतियों से निपटने के तकनीकी समाधान सुझाए। 

सीआईआई मुख्यालय में आयोजित चर्चा सत्र में आईआईएम अहमदाबाद, आईआईएम कोझीकोड, आईआईटी मद्रास, आईआईटी हैदराबाद, ओडिशा कृषि विश्वविद्यालय, तमिलनाडु कृषि विवि, आनंद कृषि, पंजाब कृषि विवि समेत 24 यूनिवर्सिटीज के 67 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। भारत में फसलों को होने वाले नुकसान को देखते हुए फसल उत्पादकता, मिट्टी के स्वास्थ्य की स्थिति और सुधार के लिए तकनीकी समाधान बताए गए। 

इस मौके पर इस्राइल की एटीपी लैब्स के सीईओ और सह संस्थापक ऐले इंगलार्ड ने कहा कि फसल स्वास्थ्य, कृषि विपणन नेटवर्क, डाटा प्रोसेसिंग और विश्लेषण, फसल बीमा लाभ और डेयरी फार्म प्रबंधन की मौजूदा चुनौतियों पर युवा प्रतिभागियों के विचार काफी लाभदायक हैं। उन्होंने कहा कि, कई टीमों को एक अच्छा बाजार पाने के लिए स्थायी मॉडल और डिजाइन समाधान के निर्माण पर मार्गदर्शन की जरूरत है। 

इस दौरान फसल बीमा मुद्दे के समाधान के लिए तेजस्वी बोगारपु, मोना कुमारी, मन मोहंती, तुषार नाना पाटिल और हितेंद्र सी बड़गुजर को प्रथम स्थान मिला। उन्हें एक लाख रुपये बतौर पुरस्कार दिए गए। दूसरे स्थान पर रहे प्रणव कुमार, देवी प्रसाद शुक्ला, गोवसल्या आर. और शशांक कुमार को डाटा प्रोसेसिंग और विश्लेषण में उनके समाधान के लिए 50 हजार रुपये दिए गए। कार्यक्रम के ज्यूरी में संजय कदावेरू, गिरीश अवल्ली और डॉ. जोआना रॉसाकी आदि शामिल थे। 
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