स्वास्थ्य विभाग ने एपिडेमिक डिजीज एक्ट 1987 के तहत गर्मियों के दिनों में फैलने वाले रोग हैजा (कालरा) को नोटिफाइड डिजीज घोषित कर दिया है। यह पहली बार है, जब चंडीगढ़ में हैजा को नोटिफाइड डिजीज के अंतर्गत लाया गया हो। इससे अब हर सरकारी व प्राइवेट हास्पिटल को हैजा मरीज की जानकारी चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी।
एंटी मलेरिया अधिकारी व एपिडेमिक सुपरवाइजर कमेटी के को-आर्डिनेटर डॉ. गौरव अग्रवाल ने बताया कि यह कदम कालरा आउटब्रेक रोकने के लिए उठाया गया है। कई बार कालरा के केस प्राइवेट क्लीनिक में रिपोर्ट हो जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग को जानकारी बाद में मिलती है। जब तक जानकारी मिलती है, तब तक केस बढ़ जाते थे। अब पहला केस आते ही हमें जानकारी मिलेगी और आधार को आसानी से ढूंढा जा सकता है। पहले भी रोगों पर बेहतर तरीके से सर्विलांस रखा जाता था, लेकिन अब अस्पतालों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है।
पिछले साल मनीमाजरा से आए थे मरीज
कालरा एक भयंकर रोग है, जो गर्मियों के अंत में या फिर बारिश के दिनों फैलता है। यदि इसका इलाज समय रहते न किया जाए तो मौत तक हो जाती है। पिछले साल मनीमाजरा के कई इलाकों में कालरा के मरीज आए थे। पानी की पाइप में लीकेज हो गई थी और 12 से ज्यादा मरीज सामने आए थे। इसमें रोगी को उल्टी-दस्त, प्यास अधिक लगना, पेशाब बंद हो जाना, दिन प्रतिदिन कमजोरी, शरीर ठंडा पड़ने जैसी बीमारियां होती हैं।
चंडीगढ़ में क्यों फैलता है कालरा
कुछ इलाकों में पानी की पाइप लाइन काफी पुरानी हो चुकी है। पानी की पाइप लाइन के साथ ही सीवर की लाइन है। कुछ लोगों ने उस पर अतिक्रमण कर रखा है या फिर पाइपलाइन के बीच में से कनेक्शन कर मोटर लगा देते हैं। इससे पानी की पाइप में मिलावट होती है और बीमारी फैलने लगती है। मनीमाजरा, मौलीजागरां, विकास नगर और रामदरबार जैसे इलाकों में अक्सर पानी में मिलावट की खबरें आती रही हैं। प्रशासन ने कई बार पानी की पाइपलाइन बदलवाने की बात कही, लेकिन अब तक इस दिशा में फिलहाल कोई काम हो नहीं पाया।