परेड ग्राउंड में लगे बुक फेयर में चीन में प्रतिबंधित साधना फालुन गोंग से जुड़ी किताबें भी हैं।
स्टाल में मौजूद फालुन दाफा से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि फालुन दाफा (फालुन गोंग) कोई किताब नहीं बल्कि एक साधना अभ्यास है। यह मन और शरीर के लिए किया जाता है।
उनका दावा है कि इसके पांच सरल व्यायाम करने से मन को पूर्णतया शांति मिलती है और शरीर पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है।
उन्होंने बताया कि यह विधि सबसे पहले चीन में साल 1992 में सार्वजनिक की गई थी। चीन के ली होंगजी इस विधि को फालुन दाफा के नाम से लोगों के बीच लेकर आए थे।
बताया जाता है कि कुछ ही सालों में इसके करोड़ों अनुयायी बन गए। इससे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने समझा कि फालुन गोंग से लोगों के मन पर कब्जा किया जा रहा है।
उसके बाद साल 1999 में इस साधना अभ्यास पर चीन में रोक लगा दी गई। अब भी यह चीन में पूरी तरह से बैन है। उसके बाद भारत में परिचय कराया गया, लेकिन यहां पर इसे फालुन दाफा के नाम से जाना जाता है।
आध्यात्मिक विकास और ज्ञान प्राप्ति का पथ :
फालुन दाफा से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि यह एक सरल साधना है। यह आध्यात्मिक विकास व ज्ञान प्राप्ति का एक पथ है। इसे सभी उम्र के लोग आसानी से कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि इसे दो भागों में बांटा जा सकता है। पहला मन की साधना व दूसरा शरीर की साधना। मन की साधना के कई पहलू है।
इनमें दुर्व्यवहार को छोड़ना, लाभ और हानि की समझ, मोहभावों का त्याग और अंत में सत्य, करुणा और सहनशीलता से आत्मसात होना शामिल है। दूसरा चरण शरीर की साधना है।
इनमें कुछ सरल व्यायाम है। इनके करने से शरीर शांत होता है और शक्ति का संचार होता है। बुक फेयर में फालुन दाफा की दो किताबें हैं।
पहली फालुन गोंग और दूसरी जुआन फालुन। बुक फेयर में आयोजक साधना का अभ्यास भी करवा रहे हैं। स्टाल में लोगों की काफी भीड़ भी जुट रही है।
योग से काफी अलग :
फालुन दाफा से जुड़े लोगों ने बताया कि यह योग से काफी अलग है। योग में कई तरह के व्यायाम होते हैं जबकि इसमें मात्र पांच प्रकार के व्यायाम हैं। इनके करने से ही मन को शांति मिलती है और शरीर को शक्ति मिलती है।
यहां कराया जा रहा अभ्यास :
इस समय दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू , कोच्चि, पुडुचेरी, नागपुर, पुणे, गुड़गांव, तिरुवनंतपुरम और हैदराबाद में फालुन दाफा का अभ्यास कराया जा रहा है।