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स्वच्छता के रंग बिखेरेंगे बच्चे, गलती की तो बड़ों को टोकेंगे

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चंडीगढ़। स्वच्छता को लेकर अब बड़े कोई गलती करेंगे तो बच्चे उन्हें टोकेंगे। क्योंकि नगर निगम ने शहर के बच्चों के लिए स्वच्छता के रंग नाम से पुस्तक तैयार की है। इसमें स्वच्छता रैंकिंग में जिन मानकों पर अंक मिलते हैं, उन मानकों के आधार पर क्या करना ठीक है और क्या गलत बताया गया है। नगर निगम अब बच्चों के माध्यम से भी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रहा है। शुक्रवार को यूटी प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने पुस्तक का विमोचन किया।
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सलाहकार ने 20 पेज की रंगारंग पुस्तक का विमोचन करते हुए कहा कि पुस्तक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सामान्य स्वच्छता के साथ-साथ स्रोत पर कचरे को अलग करने का संदेश दिया गया है। इसमें कार्टून के माध्यम से बच्चों को बेहतर तरीकेे से जानकारी दी गई है, ताकि बच्चे आसानी से बातों को समझ सकें। युवा और छात्र किसी भी सामाजिक परिवर्तन के लिए सबसे बड़े माध्यम होते हैं। यह एक अभिनव तरीका है। इस मौके पर निगम गृह सचिव नितिन यादव, शिक्षा सचिव एसएस गिल और आयुक्त आनिंदिता मित्रा मौजूद रहीं।
बच्चों के पाठ्यक्रम में जोड़ें यह पुस्तक : सलाहकार
धर्मपाल ने शिक्षा सचिव से कहा कि पुस्तक से जागरूक करने की यह पहल मिशन स्वच्छ चंडीगढ़ को एक नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस पुस्तक को बच्चों के पाठट्यक्रम में शामिल करें। इसमें रंग भरने वाले कार्टून से बच्चों को और बेहतर जानकारी मिलेगी।
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इन बातों पर किया है ध्यान केंद्रित
किताब में इधर-उधर न थूकें, अपने घर को शानदार बनाएं, प्लास्टिक का उपयोग बंद करें, जीवन जिएं स्वच्छ, पृथ्वी को हरा-भरा बनाओ, मतलबी मत बनो, अपने शहर को साफ रखो, यदि आप चाहते हैं कि सड़कें चमकें तो कूड़ा न फैलाएं इधर-उधर, दीवार पर पेशाब न करें, वॉशरूम का उपयोग करें, पानी एक अमूल्य खजाना, इसे खुशी से बचाओ, बाहर शौच करने में कोई गर्व नहीं है, अप-टु-डेट शहर के लिए कचरे को अलग करें, कागज, प्लास्टिक और कार्डबोर्ड सूखा कचरा है। सब्जी के छिलके, इस्तेमाल की गई चाय, फल और बचा हुआ भोजन गीला कचरा है। बैटरी, पेंट और कांच सभी खतरनाक कचरा हैं।
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