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Chandigarh: बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए अब नहीं देनी पड़ेगी एंटीबायोटिक की लंबी डोज, पीजीआई का शोध

Fri, 17 Oct 2025 01:30 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

शोध से यह भी स्पष्ट हुआ कि जब खून की जांच (बायोमार्कर) सामान्य हो जाए, तो इलाज रोक देना सुरक्षित है। इससे न केवल बच्चों को अनावश्यक दवाओं से बचाया जा सकता है, बल्कि अस्पताल में भर्ती रहने का समय, खर्च और दवाओं के दुष्प्रभाव भी घटेंगे।
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नवजात - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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चंडीगढ़ पीजीआई के डॉ. सौरभ दत्ता के नेतृत्व में भारतीय डॉक्टरों की एक टीम ने एक शोध किया है। इस शोध का रिजल्ट प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय पत्रिका लैंसेट क्लिनिकल मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में पाया गया है कि नवजात शिशुओं के गंभीर संक्रमण के इलाज में 6-7 दिन तक दी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाएं भी 10-14 दिन के लंबे कोर्स जितनी प्रभावी हैं। 

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शोध से यह भी स्पष्ट हुआ कि जब खून की जांच (बायोमार्कर) सामान्य हो जाए, तो इलाज रोक देना सुरक्षित है। इससे न केवल बच्चों को अनावश्यक दवाओं से बचाया जा सकता है, बल्कि अस्पताल में भर्ती रहने का समय, खर्च और दवाओं के दुष्प्रभाव भी घटेंगे। यह शोध नवजात चिकित्सा में एक नई दिशा दिखाता है, जिससे एंटीबायोटिक के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और एंटीबायोटिक प्रतिरोध जैसी गंभीर समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।

डॉ. दत्ता के साथ इस अध्ययन में मुंबई के सूर्या हॉस्पिटल के डॉ. नंदकिशोर काबरा सह-नेता रहे, जबकि टीम में पीजीआई से डॉ. शिव साजन सैनी के अलावा देशभर से डॉ. राजेंद्र प्रसाद ऐनी, डॉ. संदीप कदम, डॉ. मोनिषा रमेशबाबू, डॉ. सुप्रेत खुराना और डॉ. साई किरण शामिल थे। डॉ. दत्ता ने कहा कि यह शोध नवजात शिशुओं के इलाज की दिशा बदल सकता है और जिम्मेदार चिकित्सा की ओर एक
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महत्वपूर्ण कदम है।

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