स्मॉग को लेकर दिल्ली सरकार गलत आंकड़े पेश करके हरियाणा पर वायु प्रदूषण से संबंधित इल्जाम लगा रही है। ये कहना है हरियाणा के मुख्य सचिव डीएस ढेसी का। ऐसे दर्शाया जा रहा है कि हरियाणा के हर खेत में पराली को आग लगाई जा रही हो। मगर वास्तविकता तो यह है कि हरियाणा में 100 में से मात्र दो किसान ही पराली जला रहे हैं।
प्रदेश के सिर्फ दो जिलों सिरसा और फतेहाबाद में ही यह आंकड़ा ज्यादा हैं। मुख्य सचिव रविवार दोपहर बाद एचएयू के फैकल्टी हाउस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उनके साथ आयुक्त राजीव रंजन व उपायुक्त अशोक कुमार मीणा भी उपस्थित थे। मुख्य सचिव ढेसी ने आधिकारिक आंकड़े पेश करते हुए बताया कि हरियाणा में 13 लाख हेक्टेयर में धान की फसल होती है।
औसतन एक हेक्टेयर में पांच टन तक पराली होती है। इस तरह प्रदेश में 65 लाख मीट्रिक टन तक पराली का औसतन उत्पादन होता है। इसमें से 62 लाख 82 हजार मीट्रिक टन धान अब तक मंडियों में आ चुका है। इससे स्पष्ट है कि हरियाणा में लगभग धान कटाई का काम पूरा हो चुका है। सिर्फ फतेहाबाद-सिरसा में कटाई लेट शुरू होती है, इसलिए वहां काम शेष है।