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श्री गुरुनानक देव जी की शिक्षाओं का पालन कर ही सिखों ने दुनिया भर में कमाई इज्जत: चीफ जस्टिस बोबडे

Sat, 01 Feb 2020 07:56 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे - फोटो : अमर उजाला
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देश के मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे ने कहा कि श्री गुरुनानक देव जी की शिक्षाओं का पालन कर सिखों ने लंगर और सेवा का साथ थाम और इसी कारण दुनिया भर में सिखों ने अपनी अलग पहचान बनाई है। श्री गुरु नानक देव जी की उस समय की वाणी आज के समय भी उतनी ही प्रासंगिक है। 

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बार काउंसिल ऑफ इंडिया तथा बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा द्वारा श्री गुरुनानक देव की 550वें प्रकाशोत्सव पर पंजाब यूनिवर्सिटी जिमनेजियम हॉल में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी ने उस समय जो लंगर और सेवा का संदेश दिया था उसे अपनाकर ही सिख कौम ने दुनिया में इज्जत बनाई है। इसके साथ ही श्री गुरुनानक देव जी का 550 साल पहले के माहौल में भी सभी को बराबरी का मानना उनके संत होने की निशानी है। महिलाओं से भेदभाव को लेकर उन्होंने कहा कि जो राजा को जन्म देती है उसे किसी भी प्रकार से किसी से कम नहीं माना जा सकता। 

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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आज के समय में हर कोई खुद को बड़ा और दूसरों को छोटा साबित करने में लगा है। श्री गुरु नानक देव जी ने सभी को बराबर माना और यदि उनकी शिक्षा अपनाई नहीं गई तो यह तीसरे विश्व युद्ध का कारण बन सकता है।

इस दौरान पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि शंकर झा ने कहा कि पंजाब ने शुरू से ही हिंसा का दौर देखा है। कितने ही आक्रमणकारी आए और हिंसा का दौर चलता रहा। उस दौर में श्री गुरुनानक देव जी ने जीने की एक अलग राह दिखाई। समाज में समानता लाने की पहल की जो आगे गुरुओं ने जारी रखी। उन्हीं की सीख से सिखों की साख बनी है।

आज की तिथि में देश के विकास और सेना में पंजाब का योगदान किसी से छिपा नहीं है। इस दौरान कई देशों से प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में हिस्सा लिया। 

इससे पहले पंजाब व हरियाणा बार कौंसिल के चेयरमैन एडवोकेट हरप्रीत सिंह बराड़ ने मेहमानों का स्वागत किया, जबकि बार कौंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्र ने बार कौंसिल की प्राप्तियों संबंधी जानकारी दी।

यह भी रहे मौजूद 
इस मौके अन्य के अलावा इंग्लैंड से आए जस्टिस चीमा गरुब, वाटरलू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डोरिस जैकोबश व कैलफोर्निया यूनिवर्सिटी के डॉ. मार्क जुरजैनसमेअर, भूटान सुप्रीम कोर्ट के जस्ट्सि रिनजिन पैनजोर, श्रीलंका सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीपी सुरासेना, इंटरनेशनल बार कौंसिल के चेयरमैन होरेकीओ बरनारडज नोटो, घाना के हाई कमिश्नर मिकाइल एएनएन ओकावे व प्रसिद्ध योग मास्टर व न्यूयार्क के सिख प्रचारक हरी नाम सिंह खालसा आदि मौजूद रहे। 
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