चीफ कमिश्नर पद बहाल होने से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि शहरवासी अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर प्रतिदिन उनसे मिल सकते हैं।
वहीं इस समय प्रशासक से मिलने के लिए गवर्नर हाउस में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। कई दिन पहले समय लेना पड़ता है। यहां तक कि प्रशासन के अधिकारी भी प्रतिदिन प्रशासक से नहीं मिल पाते हैं।
- जो कोई प्रस्ताव मंजूरी के लिए चीफ कमिश्नर के पास जाएगा उस पर दो से तीन दिन में फैसला लिया जा सकता है। चीफ कमिश्नर के पास तुरंत निर्णय लेने का अधिकार होता है।
वहीं इस समय यह हाल है कि प्रस्ताव सलाहकार की मंजूरी के बाद प्रशासक के पास गवर्नर हाउस जाता है। उसकी मंजूरी में 5 से 6 माह लग जाते हैं। जबकि कई मामले तो ऐसे है जिन पर कई कई साल निर्णय नहीं हो पाता है। उदाहरण के लिए नगर निगम ने दो साल पहले बागवानी बायलॉज पास करके प्रशासन को मंजूरी के लिए भेजे थे। इन पर आज तक प्रशासक की मंजूरी नहीं मिल पाई है।
- कांग्रेस उपाध्यक्ष डीडी जिंदल का कहना है कि अंतिम चीफ कमिश्नर कृष्ण बनर्जी थे। उन्होंने बताया कि चीफ कमिश्नर जब तक रहे, तब तक अधिकारियों की जवाबदेही भी ज्यादा रही है।
- चीफ कमिश्नर समय-समय पर समस्याएं दूर करने के लिए लोगों की राय लेता है।
ये काम अटके पड़े हैं प्रशासक की मंजूरी न मिलने के कारण
- व्यापारी बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन की मांग पिछले पांच साल से कर रहे हैं। इसके साथ ही वायलेशन का जुर्माना कम करने का निर्णय प्रशासक की ओर से कई साल बाद भी नहीं लिया गया है। वायलेशन के यह नोटिस 500 रुपये स्क्वायर फुट के हिसाब से आ रहे हैं।
- हाउसिंग बोर्ड के निवासी मालिकाना हक की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही वे अपने मकान रेगुलर करने की मांग कई बार प्रशासक से कर रहे हैं। हाउसिंग बोर्ड सर्वे के बाद अपनी रिपोर्ट प्रशासक को भेज चुका है जिस पर निर्णय नहीं लिया जा सका है।
- नौकरी में आयु सीमा बढ़ाने की मांग शहर केे युवा संगठन कर रहे हैं जिस पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है
- रेजिडेंट्स हर सेक्टर में बच्चो के लिए प्ले ग्राउंड की मांग कर रहे हैं। इस पर भी कई वर्षों से प्रशासन निर्णय नहीं ले पा रहा है।