सूर्य उपासना के महापर्व पर इस बार सूर्य और शनि (पिता-पुत्र) एक साथ मिल रहे हैं। यह संयोग 30 वर्षों के बाद बन रहा है।
8 नवंबर कार्तिक शुक्ल षष्ठी का व्रत षष्ठी देवी के नाम से मनाया जाता है। इससे षष्ठी देवी के साथ सूर्य देव की भी आराधना की जाती है।
सेक्टर-30 के महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्रा के अनुसार महापर्व छठ पर सूर्य तुला राशि का होकर सप्तम स्थान में है।
इस पर्व में चंद्रमा का प्रवेश धनु राशि में है। इसका स्वामी बृहस्पति है। लग्न स्वामी मंगल है जो सूर्य की राशि में है। पूर्वाषाढ़ नक्षत्र है जिसका स्वामी शुक्र है। सूर्यास्त 5:25 मिनट पर होगा। सूर्यास्त के समय मेष लग्न है।
इसका स्वामी मंगल है। मेष लग्न में छिपते हुए सूरज को पहला अर्घ्य दिया जाएगा। चंडीगढ़ की राशि मीन है और लग्न का स्वामी मंगल आपस में मित्र होने के कारण मान सम्मान शौर्य, पराक्रम की वृद्धि होगी।
शनिवार को सूर्योदय का समय सुबह 6:48 मिनट पर तुला लग्न में है। यह योग 30 वर्षों के बाद आ रहा है। दूसरा अर्घ्य शनिवार को सूर्य शनि का बहुत ही अद्भुत योग बन रहा है।
पिता और पुत्र एक ही राशि में है। जो व्यक्ति व्रत करेगा उसको सूर्य के कारण राज पक्ष से लाभ प्राप्त होगा। शनि और सूर्य को मिलने के कारण पिता पुत्र का स्नेह और प्यार बढ़ेगा।
न्यू लेक पर हजारों व्रती जुटेंगे
पूर्वांचल वेलफेयर एसोसिएशन ने छठ की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया। घाट को जगमग रोशनी से सजाया जाएगा। भव्य आयोजन न्यू लेक पर किया जाएगा।
एसोसिएशन के प्रधान राजेंद्र सिंह, सचिव पीएन शाही और प्रवक्ता पंकज यादव ने बताया कि छठ पूजा केबाद भी न्यू लेक पर डस्टबिन की व्यवस्था हो ताकि गंदगी न फैले।