आलू किसानों के सामने नया संकट आ गया है। सब्जियों का राजा कहा जाने वाला आलू इन दिनों माटी मोल बिक रहा है। पंजाब में आलू की नई फसल आने के साथ आलू के दाम जमीन पर आ गए हैं। आलू के दाम गिरने से किसानों को आलू का वाजिब दाम नहीं मिल रहा है और स्थिति यह है कि उनकी लागत निकलना भी मुश्किल हो गया।
शहर में 80 प्रतिशत आलू पंजाब से ही आ रहा है। आलू के रेट कम होने से प्रशासन को भी मार्केट फीस में चपत लग रही है। वहीं आलू लाने वाले किसान के पल्ले भी कुछ नहीं पड़ रहा है। मंडी में दो से साढ़े तीन रुपये किलो में आलू होलसेल में बिक रहा है। जबकि परचून में 5 से 7 रुपये किलो का रेट है। मंडी में प्रतिदिन तीन से चार हजार आलू की बोरियां बिकने के लिए आ रही है।
बता दें कि एक ट्रॉली में 150 से 200 बोरी आलू की आती है। एक बोरी में 50 किलो आलू होते हैं। एक बोरी को ट्रॉली से उतारने का खर्चा ही पल्लेदार को ढ़ाई से तीन रुपये अदा की जा रही है। जबकि खाली बोरी की कीमत 15 से 18 रुपये होती है। मालूम हो कि पंजाब की मंडियों में आने वाली आलू की फसल पर मार्केट फीस 75 प्रतिशत कम कर दी गई है।
जबकि चंडीगढ़ में दो प्रतिशत चार्ज की जा रही है। मार्केट कमेटी के सचिव राजेंद्र कुमार ने बताया कि पिछले साल आलू का होलसेल रेट 10 से 15 रुपये किलो था।