चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारियों की आवासीय योजना के लिए लगभग तीन साल पहले निकाले गए ड्रा में असफल रहे कर्मचारियों को अब चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) उनकी अर्नेस्ट मनी (आग्रिम राशि) पर ब्याज देगा।
इस संबंध में सीएचबी ने प्रस्ताव तैयार कर कानूनी राय के लिए भेजा है और सीएचबी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की अगली बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है।
इससे पहले भी बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव आया था, लेकिन इसे टाल दिया गया था। इस स्कीम में असफल रहे कर्मचारी उपभोक्ता फोरम की शरण में जा रहे हैं।
कई कर्मचारियों की याचिकाओं पर पिछले कुछ महीनों में फोरम सीएचबी को 9 प्रतिशत के हिसाब से ब्याज देने का आदेश जारी कर चुका है।
सीएचबी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने इससे पहले दिसंबर, 2012 में इस आवासीय योजना में असफल रहे उन सभी आवेदकों को अर्नेस्ट मनी (आग्रिम राशि) वापस करने का फैसला लिया था
जिनके पैसे दो साल से बोर्ड के पास पड़े थे। सीएचबी ने लोगों को अर्नेस्ट मनी तो लौटा दी लेकिन ब्याज नहीं दिया। इनमें से कई असफल आवेदकों को दो साल का ब्याज उपभोक्ता फोरम के आदेश पर दे दिया गया है।
बाकी के कई और असफल आवेदक भी उपभोक्ता फोरम पहुंच गए हैं। ऐसे में सीएचबी ने अब सभी असफल आवेदकों को खुद ही ब्याज देने का प्रस्ताव तैयार कर कानूनी राय के लिए भेज दिया है। अगर कर्मचारियों को ब्याज दे दिया जाता है तो सीएचबी का कोर्ट का खर्चा बच जाएगा।
ड्रा में असफल रहे कुल 3881 कर्मचारियों में से अधिकतर ने सीएचबी को लिख कर दे दिया था कि उन्हें अर्नेस्ट मनी नहीं चाहिए और वह इस पैसे पर ब्याज भी नहीं मांगेंगे।
यही वजह है कि सीएचबी कानूनी राय मांग रहा है कि जब कर्मचारियों ने खुद अर्नेस्ट मनी रखने को कहा था तो उन्हें ब्याज दिया जाए या नहीं? ड्रा में असफल रहे आवेदक प्रशासन से फ्लैट की मांग कर रहे थे।
प्रशासन पहले तो कर्मचारियों को आश्वासन देता रहा कि ड्रा में असफल रहे कर्मचारियों को फ्लैट देने के लिए जल्द ही नई पॉलिसी बनाई जाएगी। लेकिन, इस आश्वासन के बाद भी प्रशासन ने कुछ नहीं किया।
सीएचबी की ओर से ए कैटेगरी के 252 फ्टैल बनाए जाने हैं। ए कैटेगरी का फ्लैट दो हजार वर्ग फीट (तीन बेडरूम) में बनना है और इसके लिए 312 असफल आवेदक हैं।
बी कैटेगरी के 168 फ्लैट 1400 वर्ग फीट (दो बेडरूम) में बनने हैं और इसके असफल आवेदक 155 हैं। सी कैटेगरी के 3066 फ्लैट बनने हैं और यह फ्लैट 900 वर्ग फीट में बनेंगे। इसके असफल आवेदक 2976 हैं। डी कैटेगरी के 444 फ्लैट बनने हैं और इसके असफल आवेदक 438 हैं।