चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के निर्देश के बावजूद स्मॉल फ्लैट्स योजना के अधिकतर आवंटी मासिक किराया नहीं जमा करा रहे हैं। बोर्ड ने इन सभी को जल्द किराया जमा कराने के निर्देश दिए हैं। ऐसा नहीं करने पर बोर्ड की तरफ से कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड ने आवंटियों से 52 करोड़ के करीब बकाया राशि किराये के रूप में वसूलनी है। यही कारण है कि बोर्ड ने ऐसे आवंटियों की नई सूची जारी की है और उन्हें जल्द किराया जमा कराने के निर्देश दिए हैं। अगर आवंटियों की तरफ से जल्द किराया जमा न कराया गया तो बोर्ड की तरफ से आवंटन रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके अलावा जिन आवंटियों को पहले शोकॉज नोटिस भेजे गए थे, उनके खिलाफ भी जल्द ही कार्रवाई पूरी की जाएगी।
जानकारी के अनुसार 1500 के करीब आवंटी हैं, जिनसे सीएचबी ने 52 करोड़ रुपये किराये की रिकवरी करनी है। बोर्ड ने ऐसे सभी आवंटियों की सूची वेबसाइट पर डाल दी है। सीएचबी के एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने कई आवंटियों को पहले ही शोकॉज नोटिस भेजे हुए हैं और कुछ केसों में आवंटन रद्द करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जबकि अब नई सूची के अनुसार इन डिफाल्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड ने स्कीम के तहत कई सेक्टरों में इन फ्लैट्स का निर्माण करवाया है। बता दें कि हाल ही में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने 83 आवंटियों के मकान रद्द किए हैं और 30 दिन में घर खाली करने के आदेश दिए हैं।
कम किराया होने के बावजूद नहीं करवा रहे जमा
इन फ्लैट्स का किराया काफी कम है। बोर्ड इनसे मासिक किराये के रूप में 800 से 1000 रुपये की किस्त वसूलता है, लेकिन बावजूद इसके इतनी कम राशि भी कई आवंटी जमा नहीं करवा रहे हैं। बोर्ड ने पुनर्वास योजना के तहत ही इन लोगों को अलॉटमेंट की है। योजना के तहत वर्ष 2006 में बायोमेट्रिक सर्वे करवाया गया था। आदेशों में स्मॉल फ्लैट्स के अलावा अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग स्कीम के अलॉटियों को भी रेंट जमा करवाने के लिए कहा गया है।