चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के मकानों पर चल रही डेमोलिशन ड्राइव और नोटिसों को लेकर शहर में सियासत तेज हो गई है। सेक्टर-41 में रविवार को हुई जनसभा के बाद इस मुद्दे पर सर्वदलीय कमेटी का गठन कर दिया गया है। कांग्रेस, भाजपा और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधियों को शामिल कर बनाई गई यह कमेटी अब प्रशासन के साथ बातचीत कर स्थायी समाधान तलाशेगी।
दरअसल, सेक्टर-41 से शुरू हुई कार्रवाई ने पूरे शहर में करीब 60 हजार अलॉटियों के बीच असमंजस और डर का माहौल पैदा कर दिया है। कहीं मकान सील किए जा रहे हैं तो कहीं अवैध निर्माण तोड़े जा रहे हैं। अब तक कई घरों पर कार्रवाई भी हो चुकी है। जनसभा में स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि हाउसिंग बोर्ड की ओर से भेजे गए नोटिस अचानक जारी किए गए और पर्याप्त समय भी नहीं दिया गया। वार्ड-34 के पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के इस तरह की कार्रवाई मानवीय दृष्टिकोण से गलत है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि लोगों के जीवन और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है।
बैठक में सर्वसम्मति से ऑल पार्टी कमेटी गठित करने का फैसला लिया गया। इसमें सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हैं। कमेटी प्रशासन के साथ बातचीत कर नोटिसों की समीक्षा, राहत और डिमोलिशन ड्राइव पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग करेगी। इस मौके पर आम आदमी पार्टी के प्रधान विजय पाल, कांग्रेस के प्रदेश प्रधान एचएस लक्की और भाजपा नेता शक्ति देवशाली, क्राफ्ड के चेयरमैन हितेश पुरी भी मौजूद रहे।
उधर, सेक्टर-45 डी में भी मकान मालिकों ने बैठक कर इस कार्रवाई को जनविरोधी बताया। समाजसेवी शादाब राठी ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ मकानों की नहीं बल्कि अधिकारों और सम्मान की है। चेतावनी दी गई कि यदि कार्रवाई नहीं रुकी तो हाउसिंग बोर्ड कार्यालय के बाहर धरना दिया जाएगा। गौरतलब है कि चुनाव में सभी दलों ने वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) का वादा किया था लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई नीति लागू नहीं हुई। केंद्र सरकार ने भी मार्च 2026 में साफ कर दिया था कि ऐसी कोई योजना विचाराधीन नहीं है।
उधर प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों और मास्टर प्लान-2031 के तहत की जा रही है। कई इमारतों में किए गए अवैध बदलाव उनकी संरचनात्मक मजबूती को कमजोर कर रहे हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है। प्रो. निर्मल दत्त ने कहा कि लोगों को राहत देने के लिए ओटीएस जैसी नीति जरूरी है। वहीं, एचएस लक्की और विजय पाल ने भी एक स्वर में कहा कि किसी के सिर से छत नहीं हटने दी जाएगी।
कोट
सीएचबी अलॉटियों को राहत देने के लिए प्रशासन को वन टाइम सेटलमेंट स्कीम लानी चाहिए। ऐसी ठोस नीति बने जिससे लोगों के हित सुरक्षित रहें। हम हर परिस्थिति में प्रभावित परिवारों के साथ खड़े हैं।
-एचएस लक्की, कांग्रेस प्रधान
सीएचबी अलॉटियों पर की जा रही कार्रवाई गलत है। चंडीगढ़ में वन टाइम सेटलमेंट स्कीम लागू होनी चाहिए। हम किसी भी अलाटी के सिर से छत नहीं हटने देंगे। भवनों की मजबूती की जांच किसी सक्षम संस्थान से कराई जानी चाहिए। -विजय पाल, अध्यक्ष, आम आदमी पार्टी
आम जनता को वास्तविक राहत देने के लिए प्रशासन को वन टाइम सोल्यूशन देना चाहिए। इसी मांग को लेकर सेक्टर-41 में तीनों पार्टियों ने मिलकर ऑल पार्टी कमेटी बनाई है, जो इस अभियान को आगे बढ़ाएगी। -प्रो. निर्मल दत्त, चेयरमैन, सीएचबी रेजीडेंट्स वेलफेयर फेडरेशन
दो साल पहले मकान खरीदा, अब तोड़ दिया...मेरे गहने भी मलबे में दब गए
सेक्टर-41ए के एक छोटे फ्लैट में रहने वाली बुजुर्ग एकादशी ने रोते हुए कहा कि दो साल पहले यह मकान खरीदा था और इसमें कोई बदलाव नहीं किया। में नहीं पता था कि यहां कोई गड़बड़ी है। जब नोटिस आने लगे तो काफी भागदौड़ की। सभी ने भरोसा दिलाया कि ओटीएस स्कीम आएगी लेकिन अब हमारा कंस्ट्रक्शन तोड़ दिया गया। मेरे गहने भी मलबे में दब गए। यह दर्द सिर्फ एकादशी का नहीं बल्कि सेक्टर-29, 39, 45 और 47 के करीब 60 हजार परिवारों की हकीकत बन चुका है जो आज अपने आशियाने को बचाने की जंग लड़ रहे हैं।
यह हैं दावे
कांग्रेस और इंडिया गठबंधन : 2024 के लोकसभा चुनाव में चंडीगढ़ से उम्मीदवार मनीष तिवारी ने वादा किया था कि वे दिल्ली की तर्ज पर एक संसदीय अधिनियम लाएंगे ताकि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अलॉटियों की समस्याओं को एक बार में सुलझाया जा सके।
भाजपा : भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में नीड बेस्ड बदलावों को नियमित करने के लिए वन टाइम सेटलमेंट लाने का वादा किया था। भाजपा नेताओं ने पूर्व में भी आश्वासन दिया था कि वे दिल्ली मॉडल को लागू करवाएंगे ताकि लोगों को बार-बार मिलने वाले नोटिसों से राहत मिल सके।
आम आदमी पार्टी : आप ने भी दिल्ली में लागू अपनी नीतियों का हवाला देते हुए चंडीगढ़ में इसी तरह की राहत देने का वादा किया था।
यह है हकीकत (अप्रैल 2026 तक की स्थिति)
केंद्र सरकार का रुख : मार्च 2026 में केंद्र सरकार ने लोकसभा में साफ किया था कि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अलॉटियों के लिए दिल्ली जैसी कोई एम्नेस्टी स्कीम या ओटीएस लाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
प्रशासनिक कार्रवाई : चंडीगढ़ प्रशासन का तर्क है कि चंडीगढ़ मास्टर प्लान 2031 के तहत संरचनात्मक सुरक्षा सर्वोपरि है इसलिए अवैध निर्माणों के खिलाफ बुलडोजर की कार्रवाई जारी है।