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दुश्मनों के खिलाफ और खतरनाक हुई भारतीय सेना की इंसास रायफल, किया गया बड़ा बदलाव

Tue, 01 Jan 2019 09:18 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
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इंसास राइफल
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दुश्मनों और आतंकियों के खिलाफ भारतीय सेना द्वारा प्रयोग की जाने वाली इंसास रायफल अब और घातक बन गई है, क्योंकि इसमें एक बड़ा बदलाव किया गया है। इंसास से जवान अब फायरिंग करने के साथ-साथ ग्रेनेड भी दाग सकेंगे। इसके लिए इंसास को खास ढंग से अपग्रेड किया गया है।
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इसलिए सेना अब घाटी में अधिकतर जवानों को तेजी से इंसास विद अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर (यूबीजीएल) से लैस कर रही है। भारतीय सेना में जवानों के पास अभी तक मौजूदा राइफल्स में एके-47 और इंसास शामिल है, जो अधिकतर जवानों द्वारा इस्तेमाल की जा रही है।

घाटी में जवानों को इंसास विद यूबीजीएल से इसलिए लैस किया गया है, क्योंकि वहां आतंकी हमलों और मुठभेड़ की आशंका लगातार बनी रहती है। यह अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर जवानों के पास अलग से मौजूद रहेगा और फील्ड में तैनात जवान स्थिति को देखते हुए आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान इसका प्रयोग कर सकेंगे। इंसास के साथ इसका इस्तेमाल कैसे करना है, उसकी ट्रेनिंग भी घाटी में तैनात जवानों को लगातार दी जा रही है।
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अभी तक बुल्गारिया का ग्रेनेड लांचर होता था इस्तेमाल

सेना के एक आला अफसर ने बताया कि इंसास से पहले एके-47 पर अंडर बैरल ग्रेनेड लांच चढ़ाया गया था, लेकिन ये बुल्गारिया निर्मित था। मगर इंसास को जिस ग्रेनेड लांचर से लैस किया गया है, उसे भारत में ही तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि इस ग्रेनेड लांचर की एक्युरेसी भी बहुत सटीक है और इसका भार भी ज्यादा नहीं है। घाटी में जवानों के पास मौजूद इंसास को इससे लैस किया जा रहा है।

ये है इंसास अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर की खासियत
- इंडियन मेड ग्रेनेड लांचर का कैलिबर 40 एमएम है
- इसकी इफेक्टिव रेंज 50 से 400 मीटर तक रहेगी
- भार सिर्फ 1.45 किलोग्राम है और दागने की गति 60 मीटर प्रति सेकेंड है
- इससे एक मिनट में जवान 4 से 5 ग्रेनेड दाग सकता है
- इसमें एचईएपी, एचईडीपी, एसबीआरपी, टीएमओ व टीपी तरह का ग्रेनेड इस्तेमाल हो सकेगा।
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