फौगाट ने बताया कि वे इस तरह के करीब 125 केस तो ढूंढ चुके हैं। जिनमें बोस के शहीद सिपाहियों को अंग्रेजों ने अपने रिकॉर्ड में द्वितीय विश्व युद्ध का शहीद बताया था। उनके परिजन भी आज तक इसी बात को सही मान रहे हैं। फौगाट के अनुसार मगर जब उन्होंने आजाद हिंद फौज के सिपाहियों का रिकॉर्ड खंगाला तो ऐसे शहीदों का नाम, बेल्ट नंबर, पता बोस की फौज के रिकॉर्ड में भी मिला।
इस रिकॉर्ड को ढूंढकर वे प्रदेश सरकार की हरियाणा स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समिति को 400 से अधिक सिपाहियों का रिकॉर्ड भेज चुके हैं ताकि समिति इस रिकॉर्ड से उनके परिजनों को अवगत करवाए। वे कई बार प्रदेश सरकार से भी मांग कर चुके हैं कि वे प्रदेश के द्वितीय युद्ध में शहीद जवानों के नाम भी उन्हें उपलब्ध करवाए। फौगाट ने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक हरियाणा में 2500 से अधिक सैनिक बोस की फौज में थे। जिसमें से 600 से अधिक ऐसे भी थे, जो पहले ब्रिटिश फौज का हिस्सा थे।
इसलिए मनाया जाता है आजाद हिंद सरकार स्थापना दिवस
सुभाष चंद्र बोस ने 21 अक्तूबर 1943 में सिंगापुर में आजाद हिंद सरकार या आर्जी हुकूमत-ए-आजाद हिंद के नाम से एक भारतीय अस्थाई सरकार स्थापित की। जापान ने 23 अक्तूबर 1943 को आजाद हिंद सरकार को मान्यता भी दे दी। बोस अपनी आजाद हिंद फौज के साथ 4 जुलाई 1944 को बर्मा पहुंचे। यहीं पर उन्होंने अपना प्रसिद्ध नारा ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ दिया। इसके बाद बहुत से भारतीय मूल के युवाओं ने ब्रिटिश आर्मी में छोड़ दी और वे बोस के साथ हो लिए।