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बसों में ऐसे रुकेगी इव टीजिंग, जानिए तरीका

Sat, 04 Apr 2015 04:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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बसों में इव टीजिंग रोकने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने नया तरीका अपनाया है। हाल ही में सीटीयू के बेड़े में 170 नई बसें शामिल हुई हैं। इन नई बसों में तीन-तीन सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।
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नई आने वाली दो सौ से अधिक बसें भी सीसीटीवी कैमरे से लैस हैं। बस के अंदर आगे और पीछे दो कैमरे लगे हैं जो सभी गतिविधियों पर नजर रखेंगे। तीसरा कैमरा पीछे बाहर की तरफ लगा है। इससे यदि किसी मनचले ने बस के अंदर कोई भी नापाक हरकत की तो धरे जाएंगे।

बस कहां पहुंची मोबाइल पर मिलेगी लोकेशन
‘बस कहां पहुंची और कितनी देर में आपको मिलेगी’ यह जानकारी आपको मोबाइल पर ही मिल जाएगी। इतना ही नहीं यदि किसी बस चालक ने शॉर्टकट के चक्कर में आपके बस स्टॉप को मिस किया उसकी क्लास लगेगी।
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आपको शिकायत करने की भी जरूरत नहीं है। ऐसा करते ही इसकी सूचना अधिकारियों तक पहुंच जाएगी। यह सब होगा प्रशासन द्वारा शुरू किए जा रहे इंटेलिजेंस ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएस) से। कुछ दिनों बाद सीटीयू की बसें आईटीएस के तहत ही शहर में दौड़ेंगी।
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कॉमन कंट्रोल रूम से रहेगी बसों पर नजर

चंडीगढ़ प्रशासन ने आईटीएस प्रोजेक्ट की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली है और अगले सप्ताह शहरी विकास मंत्रालय को भेज देगा। दो से तीन माह बाद इसके चंडीगढ़ में शुरू होने का दावा किया जा रहा है। बसों के रूट से लेकर स्टाफ ड्यूटी तक इसी सिस्टम के दायरे में होगी।

आईटीएस और मैनेजमेंट इंफोर्मेशन सिस्टम (एमआईएस) के बाद चंडीगढ़ में कोई भी बस ऐसी नहीं बचेगी जिसमें सीसीटीवी कैमरे न लगे हों। शहर में विभिन्न रूट पर दौड़ रही बसें जीपीएस के तहत कॉमन कंट्रोल रूम से जुड़ी होंगी।

कंट्रोल रूम से बैठकर अधिकारी मॉनीटरिंग कर सकेंगे कि चालक ने कोई भी बस स्टॉप मिस तो नहीं कर रहा है। इसमें एक तकनीक व्हीकल लोकेशन सिस्टम भी होगी, जिससे बस कहां पहुंची यह भी पता चल जाएगा। बाद में सिस्टम को मोबाइल से भी जोड़ा जाएगा। इसके बाद लोगों को अपने मोबाइल पर ही बसों की अपडेट जानकारी मिलने लगेगी।

चार शहरों में चंडीगढ़ भी शामिल
देश के चार शहरों को चुना किया गया है। जयपुर, भोपाल, मीरा भयंदर (पुणे) के साथ चंडीगढ़ भी शामिल है। इसके बाद चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट विभाग से केंद्र ने डीपीआर मांगी थी। इस हाईटेक तकनीक पर 8 करोड़ 4 लाख रुपए की लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा यूटी प्रशासन और 50 प्रतिशत गवर्नमेंट ऑफ इंडिया वहन करेगी।
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