सीटीयू की बसों से सफर करना शहर के लोगों के लिए आसान नहीं रह गया है। 2015-16 के बजट में 99 करोड़ रुपये का बजट सीटीयू को मिला, इसके बावजूद भी सीटीयू प्रबंधन की ओर से व्यवस्थाओं को दुरुस्त नहीं किया जा सका है।
लोगों को हर रूट पर सात मिनट में बस उपलब्ध कराने का प्रपोजल बनाया गया, जो कागजों तक ही सिमट कर रह गया। वहीं बजट होने के बाद भी कर्मचारियों की कमी को दूर नहीं किया जा सका है। ड्राइवर के 115 और कंडक्टर के 151 पद खाली हैं जो अब तक नहीं भरे गए हैं।
20 मिनट में नहीं मिलती बस
शहर में सीटीयू बस के 70 रूट हैं। इन पर 400 बसें चलती हैं। सीटीयू प्रशासन की ओर से यात्रियों को हर रूट पर 20 मिनट में बस उपलब्ध करवाने का दावा किया जाता है। लेकिन यात्रियों को 30 मिनट पर बस मिल पाती है। इस कारण यात्रियों का समय बस के इंतजार में खराब होता है। सीटीयू ने हर रूट पर यात्रियों को सात मिनट पर बस उपलब्ध कराने के दावे किए थे जो अब तक पूरे नहीं किए जा सके।
लांग रूट पर सीटीयू की वॉल्वो नहीं चलीं
लांग रूट पर सीटीयू की ओर से वॉल्वो चलाए जाने की योजना कागजों तक ही सीमित रह गई। अन्य शहरों की कनेक्टिविटी के लिए यहां से 100 बसें चलाने की योजना थी। इसमें शिमला, देहरादून सहित कई अन्य जगह शामिल थे। लेकिन अब तक इन स्थानों के लिए वॉल्वो नहीं चलाई गई।
नहीं हुई 160 बसों की खरीदारी
सीटीयू की ओर से 2015 में शहर के विभिन्न रूटों पर चलाने के लिए 160 करोना की बसें खरीदने की योजना बनाई गई थी। लेकिन अब तक इन बसों की खरीदारी नहीं हो पाई है।
जीपीएस से नहीं जुड़ी सीटीयू की बसें
यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर सीटीयू की बसों को जीपीएस से जोड़ने की योजना बनाई गई थी। बसों में सीसीटीवी कैमरे तो लगवाए गए, लेकिन जीपीएस नहीं लगाए गए।
सीटीयू में ड्राइवरों की भर्ती की जा रही है। जल्द ही करोना की वॉल्वों बसें चलाई जाएंगी। इससे शहर के लोगों को राहत मिलेगी। यह काम 2016 के मार्च तक हम पूरा कर लेंगे।
-अमित तलवार, निदेशक, सीटीयू