वैट और अन्य टैक्स के रेट्स की मार से चंडीगढ़ सेक्टर-26 की टिंबर मार्केट निढाल हो गई है। चंडीगढ़ प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद न तो पंजाब की तर्ज पर टिंबर पर लगने वाला वैट कम किया गया न ही टैक्स। अब हालात यह हो गए हैं कि इन विक्रेताओं को ट्राइसिटी से जबरदस्त टक्कर मिल रही है।
इसकी वजह से इनका व्यापार चौपट हो गया है। इन सारी परिस्थितियों से आक्रोश में आए इन विक्रेताओं ने चंडीगढ़ व्यापार मंडल के साथ बुधवार को सेक्टर-26 की मार्केट बंद करके धरना दिया और प्रदर्शन किया।
टिंबर मार्केट एसोसिएशन के प्रधान उमेश सूद ने कहा कि पंचकूला और मोहाली में टिंबर पर लगने वाला टैक्स सिर्फ पांच फीसदी रह गया है। चंडीगढ़ में रेट 12.5 फीसदी है। ऐसी स्थिति में व्यापारियों का काम चौपट हो गया है।
एसोसिएशन के महासचिव रजनीश शर्मा ने कहा कि सिटी की यह मार्केट अच्छे हालात में दो से ढाई करोड़ रुपये का रेवेन्यू जनरेट करती है। टिंबर मार्केट के पूर्व प्रधान योगेश गुप्ता ने कहा कि इस मामले को चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़ के पार्टियों के नेताओं के सामने भी उठाया गया पर इसका कोई हल नहीं दिखाई दे रहा।
इस मौके पर चंडीगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष चरंजीव सिंह ने कहा कि टिंबर मार्केट सिटी की सबसे पुरानी मार्केट है, यह 1958 में खुली थी और यहां से रेवेन्यू काफी ज्यादा आ रहा है। टैक्स के रेट्स को कम करवाना चाहिए।
इन पर भी एक नजर
1-वर्ष 2008 में हरियाणा सरकार ने वैट और टैक्स 12.5 फीसदी से पांच फीसदी किया।
2-इसको देखते हुए चंडीगढ़ के टिंबर विक्रेताओं ने चंडीगढ़ प्रशासन के पास अप्रोच की।
3-चंडीगढ़ प्रशासन ने आश्वासन दिया कि पंजाब में वैट घटेगा तो सिटी में भी घटाएंगे।
4-एक जून 2013 को पंजाब ने वैट और टैक्स घटाकर 12.75 से पांच फीसदी कर दिया।
5-टिंबर मार्केट के विक्रेता दोबारा प्रशासन से मिले तो उनको काफी आश्वासन दिया गया।
6-चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों ने कहा कि इस मामले को अप्रूवल के लिए भेजा गया है।
7-टिंबर मार्केट के इंतजार करने के बावजूद टैक्स और वैट के रेट घटाए नहीं गए।
8-टिंबर मार्केट के लोगों को बताया कि फाइल अप्रूवल के लिए चीफ एडमिनिस्ट्रेटर के पास है।
फैक्ट
टिंबर मार्केट बनीं-1958
कुल टिंबर विक्रेता-50
कुल परिवार निर्भर-तीन हजार
रेवेन्यू जनरेशन-तीन करोड़
पहले आते थे 25 ट्राला
अब आते हैं पच्चीस टैंपो