यूटी प्रशासन की ओर से सुखना लेक के जलस्तर को बढ़ाने के लिए भूजल का इस्तेमाल करने के फैसले को चुनौती देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। सेक्टर-48 निवासी दीप्ति ने याचिका दाखिल कर कहा कि एक ओर लोग पीने के पानी को तरस रहें हैं और सरकार भूजल स्तर को बरकरार रखने का प्रयास कर रही है तो वहीं दूसरी ओर, पीने का पानी सुखना में बहाने का फैसला ले लिया गया। इस याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान इसे उसे बेंच को रेफर कर दिया गया, जो सुखना के गिरते जलस्तर मामले में सुनवाई कर रही है।
मामले में याचिका दाखिल करते हुए दीप्ति ने कहा कि सुखना लेक में पीने के पानी को पाइप के माध्यम से लेकर जाने का प्रशासन का फैसला नेशनल वाटर पॉलिसी 2002 के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ 114 वर्ग किलोमीटर में फैला क्षेत्र है और यहां की आबादी लगभग 11 लाख है, जो लगातार बढ़ती जा रही है। बढ़ती जनसंख्या के चलते लोगों की पानी की जरूरतें भी बढ़ रही हैं।
प्रशासन ने भूजल स्तर को कायम रखने के लिए पार्क और लॉन में ट्रीटेड वाटर का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है। बावजूद इसके सुखना में पीने के साफ पानी को डालना सीधे तौर पर मौलिक अधिकारों का हनन है, जिसमें पीने के पानी का हक भी शामिल है। यूनाइटेड नेशंस की जनरल असेंबली में 28 जुलाई 2010 को पानी के अधिकार को मंजूरी दी गई थी।