स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग गिरने से निगम की काफी किरकिरी हुई है। महज साल भर में ही चंडीगढ़ दूसरे से गिरकर 11 वें स्थान पर आ गया है। हालांकि निगम पिछड़ने की जिम्मेवारी शहरवासियों पर ही मढ़ रहा है। निगम कमिश्नर बी पुरूषार्था का कहना है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सर्वे के लिए शहरवासियों ने अपनी फीडबैक नहीं दी। जबकि निगम ने तो अपनी तैयारी पूरी की थी।
अगर इंदौर की तर्ज पर हमारी फीडबैक भी ज्यादा रहती तो इससे ज्यादा अच्छा प्रदर्शन रहता। वहीं शहर के गणमान्य लोगों का कहना है कि अगर वे सफाई व्यवस्था से संतुष्ट होते तो वह फीडबैक भी दे देते। शहर की सफाई व्यवस्था की हालत ठीक नहीं है। उनका कहना है कि फीडबैक देने के लिए निगम ने लोगों को जागरूक भी नहीं किया।
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600 में से 379 अंक
स्वच्छ सर्वेक्षण में सिटीजन फीडबैक में चंडीगढ़ को 600 में से 379 अंक मिले हैं, जबकि पिछले साल शहरवासियों के फीडबैक के कारण ही शहर का सर्वे में दूसरे नंबर आया था। यही नहीं इस बार तो निगम ने खुद लोगों का डाटा फीडबैक के लिए मंत्रालय को भेजा था। इस बार नंबर-1 पर रहने वाली सिटी इंदौर को फीडबैक में 497 अंक मिले हैं।
फीडबैक देने वाले को हेल्पलाइन नंबर 1969 पर फोन करना था। उसके बाद मंत्रालय की ओर से संबधित व्यक्ति को फोन आता है और कुछ सवाल पूछे जाते हैं। इसके अलावा स्वच्छता की साइट पर जाकर भी ऑनलाइन फीडबैक दी जा सकती थी।
एप तक भी डाउनलोड नहीं कर पाए शहरवासी
स्वच्छता के एप डाउनलोड करने पर भी अंक ज्यादा मिल सकते थे, लेकिन इस कैटेगरी में 150 में से सिर्फ 30 अंक ही मिले हैं। यह 150 अंक फीडबैक वाली कैटेगरी में ही शामिल हैं।
स्वयं घोषणा में मिले 883 अंक
निगम ने शहर को साफ रखने के लिए किए कार्यों की स्वयं घोषणा भी मंत्रालय को भेजी थी। इस कैटेगरी में निगम को 900 में से 883 अंक मिले हैं। इस कैटेगरी में सबसे ज्यादा अंक हैं। जबकि इस कैटेगरी में जो इंदौर को 875 अंक मिले हैं, जोकि पहले नंबर पर आया है।
जो टीम शहर आई उसने 500 में से दिए 439 अंक
स्वच्छ सर्वेक्षण की जो टीम शहर में सर्वे के दौरान आई थी, उसने 500 में से 439 अंक चंडीगढ़ को दिए हैं। निगम का दावा है कि यह अंक भी इंदौर से ज्यादा हैं। इसी कैटेगरी में रिहायशी और स्लम कॉलोनी के निरीक्षण में 60 में से 38 अंक टीम ने दिए हैं जबकि कम्युनिटी टायलेट में 180 में से 145 अंक मिले हैं। फल और सब्जी मंडी के सर्वे में 70 में से 39 अंक मिले हैं।
27 हजार से ज्यादा लोगों ने दी फीडबैक
कुल 27271 शहरवासियों ने शहर की सफाई व्यवस्था पर फीडबैक दी है जिनमें से 10 हजार लोगों का डाटा खुद निगम ने मंत्रालय को फीडबैक लेने के लिए भेजा था।