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लाला लाजपत राय का खून से सना कुर्ता देख आज भी सीने में धधकने लगते हैं अंगारे

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चंडीगढ़। साइमन कमीशन के विरोध में अंग्रेजी हुकूमत को हिला देने वाले पंजाब केसरी लाला लाजपत राय को भला कौन नहीं जानता। लाहौर में उनके इस आंदोलन भयभीत हुए अंग्रेजों ने निहत्थे आजादी के परवानों पर लाठियां बरसाईं। लाठियों के वार के कारण लाला लाजपत राय 17 नवंबर 1928 को शहीद हो गए। इस आंदोलन के दौरान उनके खून से सना कुर्ता अगर आज भी देख लें तो अंग्रेजों के उस कृत्य पर सीने पर अंगार धधकने लगते हैं। लाला जी के शहीदी दिवस पर वीरवार को सेक्टर-15 स्थित लाला लाजपत राय भवन के द्वारका दास लाइब्रेरी में प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी में उनके खून से सना कुर्ता, उनका अचकन, थैला, गाउन, चादर और किताबें शामिल की गई। जब लोगों ने इन्हें करीब से देखा तो उनकी आंखें नम हो गईं।
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शहीदी दिवस पर लाइब्रेरी की लाइब्रेरियन अलका व अन्य लोगों ने लाला जी के चित्र पर माल्यापर्ण किया। यह प्रदर्शनी शुक्रवार को समाप्त हो जाएगी। उनके कुर्ता व अन्य चीजों को पिछले 94 वर्षों से यहां संभालकर रखे हैं। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शनी में पहुंचे और लाला जी को श्रद्धांजलि अर्पित किए। प्रदर्शनी में उनके द्वारा लिखी 37 किताबें और उन पर अन्य लेखकों द्वारा लिखी किताबों को भी रखा गया है। लाला जी की ओर से गोखले को लिखी चिट्ठियों का कलेक्शन को भी प्रदर्शनी में रखा गया है। लाला जी का जन्म पंजाब के मोगा में 28 जनवरी 1865 को हुआ था।
गर्म दल लाल, बाल और पाल में से एक थे लाला जी
लाला जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गरम दल के तीन नेताओं लाल बाल और पाल में से एक थे। लाला लाजपत राय प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे। लाठीचार्ज के बाद लगी चोट पर लाला जी ने कहा था कि उनके शरीर पर मारी गईं लाठियां हिंदुस्तान में ब्रिटिश राज के लिए ताबूत की आखिरी कील साबित होगी। लाला लाजपत राय युवाओं के प्रेरणास्रोत थे। उनसे प्रेरित होकर ही भगत सिंह, उधम सिंह, राजगुरु, सुखदेव आदि देशभक्तों ने अंग्रेजों से लोहा लिया था।
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1921 में हुई थी लाइब्रेरी की स्थापना
वर्ष 1921 में लाहौर में दुर्गादास लाइब्रेरी की स्थापना की गई थी। इस लाइब्रेरी के लिए लाला जी ने अपनी बहुत सी किताबों को दान किया था। लाला जी ने अपने दोस्त के नाम पर लाइब्रेरी का नाम रखा क्योंकि लाला जी का दोस्त द्वारिका दास की किताबें उनसे अधिक थी। इसलिए इस लाइब्रेरी का नाम अपने दोस्त द्वारका दास के नाम पर रखा। भारत-पाक बंटवारे के बाद लाइब्रेरी शिमला और 1962 में पंजाब यूनिवर्सिटी और 1966 में सेक्टर- 15 स्थित लाला लाजपत राय भवन में लाया गया।
लाला जी की अंतिम याद हमारी विरासत
लाला लाजपत राय की याद हम सभी के लिए विरासत है। उनके सामान, जिसमें कुर्ता, थैला व अन्य चीजों को पूरी तरह से संभालकर रखा जाता है। उनके कपड़ों को फ्यूमीगेशन और प्लास्टिक के कवर में रखकर सुरक्षित किया गया है। उनके जन्मदिवस और शहीदी दिवस पर प्रदर्शनी में उनकी यादों को लोगों के दर्शन के लिए रखा जाता है।
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-अलका, लाइब्रेरियन, द्वारका दास लाइब्रेरी सेक्टर 15
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