कार्यकाल समाप्त होने से तीन महीने पहले ही एडवाइजर परिमल राय का तबादला कर गोवा का मुख्य सचिव बनाया गया है। उनकी जगह 1986 बैच के अधिकारी व दिल्ली के विच्च निगम के चेयरमैन-कम-एमडी मनोज परिदा को एडवाइजर के तौर पर नियुक्त किया गया है। 1985 बैच के आईएएस परिमल राय ने चंडीगढ़ का कार्यभार 14 मार्च 2016 को संभाला था। उनका कार्यकाल मार्च 2019 में पूरा होना था। उनके तबादले की पिछले दो से तीन महीने पहले चर्चा चल रही थी। बताया जा रहा है कि निजी कारणों वे यहां से जाना चाहते थे। उनकी फाइल पिछले कुछ दिनों से चल रही थी। बीते शनिवार को ही उनके आर्डर कर दिए गए थे। अपने कार्यकाल के दौरान वे विवादों से दूर रहे हैं। समारोह व आयोजनों से भी दूरी बनाकर रखते थे।
गोवा के मुख्यमंत्री पर्रिकर के करीबी हैं परिमल
वरिष्ठ आईएएस परिमल राय गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के करीबी रहे हैं। पर्रिकर जब साल 2013 में गोवा के चीफ मिनिस्टर थे, तब परिमल भी वहीं पोस्टेड थे। वे पीडब्ल्यूडी, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, इंडस्ट्रीज और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट जैसे कई महत्वपूर्ण डिपार्टमेंट संभालते थे। जब मनोहर को केंद्र में बुलाकर देश का रक्षा मंत्री बनाया गया तो कुछ दिनों बाद परिमल राय का भी ट्रांसफर कर दिया गया था। उस समय चर्चा हुई थी कि उन्हें पर्रिकर के साथ जोड़ा जा सकता था, लेकिन उस दौरान उनकी नियुक्ति दिल्ली में कर दी गई। इस समय पर्रिकर की तबियत काफी खराब चल रही है। कई महीनों बाद रविवार को उनकी एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें वे काफी कमजोर लग रहे हैं। उसमें साफ दिख रहा है कि उनकी नाक में नली लगी है। बताया जा रहा है कि वे भी काफी दिनों से मांग कर रहे थे कि परिमल को गोवा भेज दिया जाए, ताकि उनका सारा कामकाज संभाल लें। नाम न छापने की शर्त पर अधिकारियों ने बताया कि दोनों के बीच अच्छी ट्यूनिंग है। उनके आने से पर्रिकर और गोवा दोनों को मजबूती मिलेगी।
किरण खेर ने चुनाव तक तबादला रुकवाने की कोशिश की थी
परिमल राय और किरण खेर के बीच अच्छा तालमेल था। बताया जा रहा है कि किरण खेर को उनके तबादले की सूचना पहले से ही मिल चुकी थी। इस बारे में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से गुजारिश की थी कि अगले लोकसभा चुनाव तक परिमल को चंडीगढ़ में ही रखा जाए, लेकिन फिलहाल उनकी नहीं चल पाई है। सांसद किरण खेर के कई प्रोजेक्ट को उन्होंने रफ्तार दी। खेर के हर आधिकारिक प्रोग्राम में उनकी मौजूदगी भी रहती थी। जब तक वे रहे, उन्होंने खुद किसी प्रोजेक्ट का शिलान्यास नहीं किया बल्कि खेर से ही कराया। हालांकि, खेर के करीबी होने से वे भाजपा के एक गुट के निशाने पर भी आ गए थे।
नियमों के खिलाफ नहीं जाते और सफलता का क्रेडिट भी नहीं लेते थे
संभव है कि ऊपरी तौर पर शहरवासियों को लगे कि एडवाइजर परिमल राय आए और चलते बने। लोग यह भी धारणा बना सकते हैं कि उन्होंने कोई बड़ा काम नहीं किया, लेकिन सच्चाई इसके उलट है। एडवाइजर परिमल राय नियमों के पक्के माने जाते थे। वे फाइल लेकर खुद गवर्नर साहब के पास जाते थे। फैसले लेने में वे समय नहीं लगाते थे। अच्छी बात यह थी कि वे किसी काम या सफलता का खुद कभी क्रेडिट नहीं लेते थे। एक अधिकारी ने बताया कि पंजाब यूनिवर्सिटी चुनाव के दौरान स्टूडेंट सेक्टर-16 के पास हुड़दंग मचा थे। इसकी एक तस्वीर किसी ने एडवाइजर को भेज दी थी।
उन्होंने तुरंत एसएसपी और अन्य अधिकारियों को मैसेज भेजकर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए थे। 12 मिनट में स्थिति में कंट्रोल में आ गई। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि अखबारों में पब्लिक से जुड़े मुद्दे की खबर प्रकाशित होने के बाद वे सुबह पांच बजे ही अधिकारियों के वाट्सएप ग्रुप पर जवाब मांग लेते थे। चंडीगढ़ के वैट घोटाले के खुलासे का श्रेय उन्हीं को जाता है। इसमें 53 कंपनियों ने वैट जमा कराने में गड़बड़ी की थी। प्रशासन का समारोह हो या किसी प्रोजेक्ट का शिलान्यास वे हमेशा पीछे ही रहते थे। हालांकि, कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान हुए घोटाले में उनके नाम पर अंगुलियां जरूर उठी थीं, लेकिन किसी भी मामले वे दोषी साबित नहीं हुए।
पुडुचेरी में कई काम किए, एक साल से दिल्ली में कार्यरत हैं नए एडवाइजर
परिमल राय के तबादले के बाद नवनियुक्त एडवाइज मनोज परिदा भी यूटी कैडर के 1986 बैच के आईएएस आफिसर हैं। एक साल से वे दिल्ली में कार्यरत हैं। मौजूदा समय में वे दिल्ली वित्त निगम के चेयरमैन-कम-एमडी के पद पर कार्यरत हैं। वे दिल्ली के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के पद पर नियुक्त थे। मूल रूप से उड़ीसा के निवासी परिदा तीन नवंबर 2017 से पहले पुडुचेरी के मुख्य सचिव थे। वहां पर अपने कार्यकाल के दौरान पुडुचेरी से कई उड़ानों की बहाली, स्मार्ट सिटी के तहत कार्यों, समुद्र तट बहाली और रेल की कई परियोजनाओं को हरी झंडी दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही, लेकिन इस दौरान बीजेपी से सदस्य गवर्नर किरण बेदी और कांग्रेस पार्टी से ताल्लुक रखने वाले चीफ मिनिस्टर वी नारायणसामी के बीच खींचतान के चलते उनका तबादला कर दिया गया था।