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बात हक की: जब 50 पैसे के लिए उपभोक्ता आयोग पहुंचा था ग्राहक... रेस्टोरेंट को देने पड़े थे 500 रुपये

Tue, 30 Jul 2024 03:18 PM IST
निवेदिता वर्मा मोहित कुमार पांडेय, संवाद, चंडीगढ़

सार

देश में उपभोक्ता मामलों का निपटारा करने में चंडीगढ़ पहले स्थान पर बना हुआ है। इसके साथ 91 प्रतिशत की दर से शहर में मामले दर्ज हो रहे है। इसकी महत्वपूर्ण वजह है कि चंडीगढ़ में लोग पैसों के लिए नहीं हक के लिए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटा रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik
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विस्तार
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चंडीगढ़ में उपभोक्ता आयोग का गठन 1989 में हुआ था। बीते 36 साल में आयोग में एक लाख तीन हजार से अधिक मामले आ चुके है, जिसमें से करीब 95 प्रतिशत मामलों का निपटारा हो चुका है। चंडीगढ़ देश में एकमात्र ऐसा जिला है, जहां दो जिला उपभोक्ता आयोग है। 

क्या कहता है उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम- 2019

पुराने एक्ट के अनुसार मामलों को निपटाने के लिए अधिक समय लगा करता था। नए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम- 2019 के मुताबिक उपभोक्ता आयोग को मामलों का निपटारा करने में कम से कम तीन माह और अधिक से अधिक पांच माह का समय लगाना है। वहीं, नए अधिनियम में बुजुर्ग और दिव्यांग को प्राथमिकता देने की बात कहीं गई है। बीते दो सालों में आयोग में केस की संख्या में बढ़ोतरी हुई। पुराने एक्ट में पहले उपभोक्ता को शिकायत वहां करनी पड़ती थी, जहां विपक्षी पार्टी हो या कार्य हुआ हो। पर अब नए एक्ट में उपभोक्ता को उसके गृह क्षेत्र से केस लड़ने का अधिकार दिया गया है।

हक के लिए लड़े गए कुछ केस

कोल्ड ड्रिंक ठंडी के लिए 50 पैसे लेना पड़ा महंगा

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साल 1994 में सेक्टर -17 स्थित मुस्कान रेस्टोरेंट ने वकील पंकज चांद गोठिया ने 4.50 रुपये की कोल्ड ड्रिंक के लिए पांच रुपये लिए थे। 50 पैसे अधिक लेने की वजह पूछने पर कहा गया कि कोल्ड ड्रिंक ठंडी करने के लिए 50 पैसे अतिरिक्त लिए गए हैं। इस मामले को लेकर पंकज उपभोक्ता आयोग में पहुंचे और आयोग को दलील दी कि कोल्ड ड्रिंक का तो अर्थ ही है ठंडी ड्रिंक फिर अतिरिक्त शुल्क कैसे लिया जा सकता है। मामले की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता आयोग ने मुस्कान रेस्टोरेंट को शिकायतकर्ता को 500 रुपये का हर्जाना देने के निर्देश दिए था।

कॉफी शॉप को मोबाइल नंबर लेना पड़ा था महंगा
साल 2023 में प्रतीक सेक्टर-10 स्थित कॉफ़ी बीन एंड चाय लीफ में कॉफी पीने के लिए पहुंचे थे। वहां, उससे कॉफी पीने के लिए उसका मोबाइल नंबर मांगा गया। इसके बाद उसने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दी कि किसी भी जगह कुछ भी ऑर्डर देने के लिए निजी जानकारी शेयर करने की जरूरत भला क्यों है। दलील दी गई कि उपभोक्ता मामले के मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार उपभोक्ता से निजी जानकारी जैसे मेल, मोबाइल नंबर, पता नहीं लिया जा सकता है। मामले की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता आयोग ने कॉफी हाउस को शिकायतकर्ता को ढाई हजार रुपये मानसिक उत्पीड़न के लिए देने के आदेश दिए थे। इसके साथ कंज्यूमर वेलफेयर फंड में दस हजार रुपये जमा करने के आदेश दिए थे।
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डोमिनोज पिज्जा ने कैरी बैग के 13 रुपये चार्ज किए
साल 2019 में संगीता नाम की महिला ने डोमिनोज पिज्जा से पिज्जा खरीदा था। जब उन्होंने कैरी बैग मांगा तो उनसे 13 रुपये चार्ज किए गए। इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत उपभोक्ता आयोग में दी कि व्यक्ति गर्म पिज्जा हाथ में कैसे लेकर जाएगा। कैरी बैग देना तो दुकानदार की जिम्मेदारी है। मामले पर सुनवाई करते हुए उपभोक्ता आयोग ने डोमिनोज़ को शिकायतकर्ता को कैरी बैग के लिए गए 13 रुपये लौटाने के साथ 1500 रुपये मानसिक उत्पीड़न के लिए देने को कहा था। इसके साथ पीजीआई गरीब रोग कल्याण कोष में 4.90 लाख रुपये देने के आदेश दिए थे।

रेस्टोरेंट ने 20 वाली बोतल के लिए 30 रुपये
साल 2019 में सेक्टर-42 निवासी नवनीत जिंदल ने उपभोक्ता आयोग को दी शिकायत में बताया था कि एलांते मॉल के आकाश रेस्टोरेंट में उनसे 20 रुपये की बोतल के 30 रुपये लिए गए। पूछने पर बताया गया कि आपने रेस्टोरेंट में बैठकर पानी पिया है। इसलिए दस रुपये अतिरिक्त लिए गए। मामले की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता आयोग ने रेस्टोरेंट को शिकायतकर्ता को मानसिक उत्पीड़न और केस में खर्च के लिए 30 हजार रुपये देने के आदेश दिए थे। इसके साथ कंज्यूमर वेलफेयर फंड में पांच लाख रुपये जमा करने के आदेश दिए थे।

उपभोक्ता आयोग में ऐसे खुद भी लड़ सकते है अपना केस

एक सादे कागज पर निर्धारित वाद शुल्क के साथ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दाखिल कर सकते है। इसके लिए दोनों पक्षों में से किसी एक का शहर से संबंध होना जरूरी है। उदाहरण स्वरूप जिस कंपनी के खिलाफ शिकायत देनी है। उसकी पॉलिसी नियम व शर्तों की कॉपी, कंपनी को भेजी गई मेल या लीगल नोटिस की कॉपी, शिकायत के लिए प्रमाण पत्र, कैश मेमो, रसीद की कॉपी, बिल, गारंटी या वारंटी कार्ड की तीन कॉपी फाइल कवर के साथ, विपक्षी को भेजने के लिए बिना फाइल कवर के बिना पूरी फाइल आयोग को देनी होगी। फोरम के पक्ष में पोस्टल ऑर्डर या डिमांड ड्राफ्ट के जरिये वाद शुल्क जमा होगा।

आर्थिक रूप से तय होगी फीस

- 5 लाख रुपये तक कोई फीस नहीं

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- 5 लाख से 10 लाख तक के लिए 200 रुपये
- 10 लाख से 20 लाख रुपये तक के लिए 400 रुपये
- 20 लाख से 50 लाख तक के लिए 1000 रुपये
( जिला उपभोक्ता )

- 50 लाख से 1 करोड़ तक के लिए 2000 रुपये
- 1 करोड़ से दो करोड़ रुपये तक के लिए 2500 रुपये
(राज्य उपभोक्ता आयोग)

- दो करोड़ से चार करोड़ रुपये तक के लिए 3000 रुपये
- चार करोड़ से छह करोड़ रुपये तक के लिए 4000 रुपये
-छ करोड़ से आठ करोड़ रुपये तक के लिए 5000 रुपये
-आठ करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक के लिए 5000 रुपये
- दस करोड़ से अधिक के लिए 7500 रुपये
( राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग)

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