वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन की दौड़ में शामिल चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन का दूसरा पहलू निर्मम है। यदि किसी की रेलवे स्टेशन के आसपास मौत हो जाए या रेल की चपेट में आने से कोई घायल हो जाए तो उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए जीआरपी के पास एंबुलेंस तक का इंतजाम नहीं है।
ऐसे में जीआरपी को लोकल एंबुलेंस और ऑटोरिक्शा की मदद लेनी पड़ती है। सिर्फ इतना हीं नहीं शव को कवर करने के लिए पॉली बैग तक नहीं है। जबकि हर माह रेलवे लाइन पर हादसों में 6 से 8 लोगों की मौत हो जाती है। 2015 में रेलवे लाइनों पर मिले शवों के आंकड़े 80 के करीब थे।
फर्स्ट एड के लिए डॉक्टर तक नहीं
चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर रेल हादसे में घायलों को प्राथमिक उपचार देने के लिए डॉक्टर तक की सुविधा नहीं है। उसके लिए भी रेलवे के डॉक्टरों की मदद लेनी पड़ती है। यहां तो रेलवे का भी डॉक्टर भी नहीं है। घायलों का इलाज तो दूर चंडीगढ़ में तैनात रेलवे के अधिकारियों और मुलाजिमों को इलाज के लिए अंबाला जाना पड़ता है।
शव और घायलों को अस्पताल ले जाने के लिए वसूली
रेल हादसे में घायलों और शवों को अस्पताल ले जाने के लिए जीआरपी को प्राइवेट एंबुलेंस और ऑटो रिक्शा की मदद लेनी पड़ती है। इस काम के लिए प्राइवेट एंबुलेंस वाले करीब 500 रुपये और ऑटो रिक्शा वाले चार सौ रुपये चार्ज करते हैं।
केस नंबर एक
नवंबर में रेलवे स्टेशन पर एक युवक पुलिया के नीचे गिर गया था। जीआरपी के पास एंबुलेंस नहीं होने की वजह से मौके से दो घंटे बाद उसे पंचकूला सेक्टर 6 के जनरल अस्पताल पहुंचाया गया। अगर रेलवे स्टेशन पर एंबुलेंस की सुविधा होती तो युवक की जान बच सकती थी।
केस नंबर दो
पांच अक्तूबर 2015 को रेल की चपेट में आने से मानसिक रूप से बीमार एक महिला की मौत रेलवे स्टेशन के पंचकूला साइड हो गई थी। जीआरपी मुलाजिम मौके पर पहुंचे, लेकिन उनके पास शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस का इंतजाम नहीं था। उन्हें ऑटो रिक्शा से शव को पंचकूला सेक्टर 6 के जनरल अस्पताल पहुंचाना पड़ा।
केस नंबर तीन
दिसंबर में एक युवक चंडीमंदिर के पास शताब्दी की चपेट में आ गया था। उसे ड्राइवर ने चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पहुंचाया। लेकिन चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर एंबुलेंस की सुविधा नहीं होने की वजह से युवक प्लेटफार्म नंबर एक पर करीब 45 मिनट तक तड़पता रहा। उसके बाद जीआरपी ने एक ऑटो चालक की मदद से उसे जीएमसीएच 32 पहुंचाया। जहां युवक की मौत हो गई। अगर युवक समय से अस्पताल पहुंच जाता तो युवक की जान बच जाती।
जीआरपी एसएचओ हरनेक सिंह से सवाल जवाब
सवाल-रेलव लाइन पर घायलों को अस्पताल ले जाने के लिए आपके पास एंबुलेंस की सुविधा है
जवाब - नहीं
सवाल - घायलों और शवों को अस्पताल कैसे पहुंचाया जाता है
जवाब - ऑटो और प्राइवेट एंबुलेंस की मदद से
सवाल-एंबुलेंस के लिए आपने मांग की
जवाब- अभी दो माह पहले मीटिंग के दौरान जीआरपी एसपी के समक्ष मांग रखी थीं, उन्होंने आश्वासन दिया है कि मार्च तक एंबुलेंस की व्यवस्था कर दी जाएगी।