स्कूलों द्वारा मनमानी तरीके से फीस बढ़ाने के खिलाफ दाखिल याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने बढ़ाई गई फीस जमा करवाने को लेकर अभिभावकों को आदेश दिए। हालांकि हाईकोर्ट ने स्कूलों द्वारा बढ़ाई गई फीस के लिए दी गई सफाई को जांचने के लिए शिक्षा विभाग के एडिशन चीफ सेक्रेटरी को कमेटी बनाने के आदेश दिए। कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि फीस बढ़ाने के लिए जो सफाई दी गई है वह कमेटी के सामने झूठ निकली तो बढ़ी फीस की वसूली के लिए स्कूल की प्रॉपर्टी तक नीलाम की जा सकती है।
मामले में याचिका दाखिल करते हुए सुरेंद्र व अन्य तथा डीपीएसजी पेरेंट्स एसोसिएशन ने स्कूलों द्वारा बढ़ाई गई फीस को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वर्तमान में बनाई गई कमेटियां केवल क्लेरिकल काम तक ही रह गई हैं। स्कूलों द्वारा की जा रही फीस वृद्धि पर इनका कोई कंट्रोल नहीं है। स्कूल मनमाने तरीके से फीस में वृद्धि कर रहे हैं जो हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ है। हाईकोर्ट ने डिवीजन बेंच के आदेशों को देखने के बाद कहा कि इस मामले में वे खुद निगरानी नहीं कर सकते हैं।
हाईकोर्ट ने हरियाणा एजुकेशन विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को आदेश दिया कि वे एक कमेटी गठित करें। यह कमेटी देखेगी कि स्कूल फीस की वृद्धि कैसे की गई है और वृद्धि के लिए जो कारण और कारक बताए गए हैं वे सही हैं या नहीं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने छात्रों के अभिभावकों को आदेश दिए कि वे बढ़ी हुई फीस को जमा करवा दें। यदि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह पाया कि फीस गलत तरीके से वसूल की है तो ऐसी स्थिति में स्कूलों की प्रोपर्टी नीलाम करके भी वसूली करनी पड़ी तो की जाएगी।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने स्कूलों को अंडरटेकिंग देने के आदेश दिए कि यदि वसूली करनी पड़ी तो प्रॉपर्टी बेचकर भी वसूली की जा सकती है। इन आदेशों के साथ ही हाईकोर्ट ने 28 फरवरी तक कमेटी को फीस को लेकर अपनी रिपोर्ट जमा करवाने के आदेश दिए हैं।
रिटायर जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाने की मांग
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार, महामंत्री भारत भूषण बंसल तथा पंचकूला जिला अध्यक्ष सलाऊद्दीन ने मांग की कि फीस एंड फंड रेगुलेटरी कमेटी जो डिवीजनल कमिश्नर की अध्यक्षता में बनाई गई है, उसे रिटायर जज की अध्यक्षता में बनाया जाए। संगठन ने दलील दी कि वर्तमान में यह कमेटियां राजनीतिक हस्तक्षेप से ग्रसित हैं ऐसे में यह हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा जारी किए गए आदेशों के अनुरूप काम नहीं कर रही हैं।