डड्डूमाजरा स्थित डंपिंग ग्राउंड न सिर्फ आसपास के इलाकों के लिए बल्कि पूरे शहर के लिए नासूर बन चुका है। 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां पर यहां पर करीब पांच लाख टन से ज्यादा कूड़े का पहाड़ खड़ा है। पिछले 50 साल से यहां पर कूड़ा जमा हो रहा है और समय-समय पर आग लगती रहती है। पिछले कई सालों से प्रशासन डंपिंग ग्राउंड के कूड़े का निस्तारण करने के लिए दावा करता आया है लेकिन फिलहाल इस दिशा में कोई भी कार्य नहीं हुआ है।
आग लगने पर कितना बढ़ा प्रदूषण
प्रदूषण छह से पहले छह के बाद बढ़ोतरी फीसदी
पीएम 2.5 37 48 25
पीएम 10 106 129 18
एसओ 2 6 9 40
बैंजीन 5 6 26
टाल्यूईन 0.38 0.4 24
धीरे-धीरे सुलगने वाली आग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। इससे आंखों में जलन और गले में खराश होने का खतरा रहता है। पिछले दिनों जो आग लगी, उसका असर आसपास के लोगों की सेहत पर हो सकता है। -रविंद्रा खैवाल, एडिशनल प्रोफेसर स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ पीजीआई
चंडीगढ़ प्रशासन को कूड़े को अलग-अलग करने के लिए जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। गीले के साथ सूखा कूड़ा आने से आग लगने का खतरा रहता है। सूखे कूड़े को रिसाइकिल किया जा सकता है। इससे न सिर्फ हवा के जरिए शरीर को नुकसान पहुंचता है, बल्कि ग्राउंड वाटर में भी मिलावट का खतरा रहता है। -सुमन मोर, विभागाध्यक्ष पर्यावरण विभाग पीयू