चंडीगढ़ में प्रदूषण बढ़ने के कारणों का पता लगाएगी सीपीसीसी।
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पांच लाख लोगों के लिए बसाए गए चंडीगढ़ में अब करीब 11 लाख लोग रह रहे हैं। सड़कों पर चल रही गाड़ियों की संख्या भी लगभग इतनी ही है। इसलिए कुछ साल में प्रदूषण बढ़ा है। अब चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी एक अध्ययन कराने जा रही है कि शहर के किन इलाकों में और क्यों प्रदूषण बढ़ रहा है। दावा किया जा रहा है इस रिपोर्ट के आधार पर भविष्य की योजना तय की जाएगी।
वायु प्रदूषण पर विस्तृत अध्ययन कराने के लिए सीपीसीसी की तरफ से योग्य एजेंसी की तलाश पिछले काफी समय से की जा रही है इसलिए अब विभाग ने दोबारा योग्य एजेंसियों से इस संबंध में आवेदन मांगे हैं। अध्ययन के जरिए ये पता लगाने का प्रयास किया जाना है कि शहर के किन एरिया में अधिक प्रदूषण है और उसके कारण क्या हैं। अध्ययन के नतीजों के आधार पर ही प्रशासन की तरफ से वायु प्रदूषण को कम करने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। एरिया वाइज भी ये स्टडी होगी, जिसमें प्रदूषण के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए डेटा तैयार किया जाएगा।
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पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने जारी किया फंड
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने प्रशासन को इस काम के लिए फंड भी जारी किया था और उसी के तहत कमेटी इस पर आगे काम कर रही है। सीपीसीसी के सदस्य सचिव अरुलराजन पी ने इस संबंध में बताया कि वह ये स्टडी करवाने जा रहे हैं, जिसके लिए हाल ही में उन्होंने इच्छुक एजेंसियों से आवेदन मांगे थे। कम एजेंसियों ने इस काम के लिए आवेदन किया था, जिस कारण उन्होंने दोबारा टेंडर जारी किया है ताकि अधिकतम एजेंसियां इस स्टडी के लिए आगे आएं।
ऐसे पेड़ लगाने की योजना, जो कम करेंगे प्रदूषण
शहर की जनसंख्या और वाहनों में तेजी से वृद्धि के कारण शहर में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है, जिससे प्रशासन के सामने एक नई चुनौती पैदा हो गई है। शहर में वायु प्रदूषण के अलग-अलग कारण है। इनमें जिन कारणों से अधिक प्रदूषण हो रहा है, उनकी पहचान व उनके समाधान के लिए ही प्रशासन ने ये अध्ययन कराने का फैसला लिया है। बता दें कि वायु प्रदूषण के स्रोतों में प्रमुख रूप से वाहन, उद्योग, घरेलू और प्राकृतिक स्रोत शामिल है। हवा में प्रदूषण होने के चलते ये लोगों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। स्टडी के बाद ही ये सामने आएगा कि किस तरह का प्रदूषण कौन से एरिया में अधिक है और इनके समाधान के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। विभाग के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र में वह ऐसे पेड़ लगाएंगे जो यहां पर प्रदूषण को कम करने में मदद करेंगे।