चंडीगढ़। दो लाख रुपये की रिश्वत प्रकरण में चंडीगढ़ पुलिस के डीआईजी ने बुधवार को सीबीआई अदालत में अपना जवाब दायर किया। उन्होंने अदालत को बताया कि इंस्पेक्टर जसविंदर कौर के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने के लिए संबंधित अधिकारियों को पहले ही सूचना दे दी गई है। अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी देना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, इसलिए चंडीगढ़ पुलिस इसमें जल्द जवाब दायर करे।
पुलिस का कहना है कि मामले से संबंधित चार्जशीट और जांच रिकॉर्ड खंगालने में उन्हें काफी समय लग रहा है इसलिए पुलिस ने अदालत से पांच दिन का समय और मांगा है। इस पर सीबीआई के सरकारी वकील ने कहा कि पुलिस को पहले ही पांच महीने 10 दिन का समय दिया जा चुका है। फिर भी पांच दिन का समय देने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी।
बीते बुधवार को जसविंदर कौर के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने पर चंडीगढ़ डीआईजी को स्टेटस रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया गया था। बता दें कि 2017 में निलंबित एसआई मोहन सिंह पर दो लाख रुपये की रिश्वत लेने का मामला दर्ज किया गया था, जिसमें इंस्पेक्टर जसविंदर कौर का नाम भी सामने आया था। सीबीआई ने इंस्पेक्टर जसविंदर कौर को हाल ही में पांच लाख रुपये की रिश्वत लेने के एक अन्य मामले में भी आरोपी बनाया है और वह अभी फरार चल रही हैं।
बता दें कि दो लाख रुपये की रिश्वत मामले में शिकायतकर्ता प्रेम सिंह बिष्ट ने फरवरी में जसविंदर कौर को केस में आरोपी बनाने के लिए याचिका दायर की थी। इसके बाद 13 फरवरी को अदालत ने चंडीगढ़ पुलिस को जसविंदर कौर के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। प्रेम सिंह ने याचिका में कहा कि 5 महीने बीत चुके हैं लेकिन अभी भी उनकी याचिका पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने याचिका में कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत लोक सेवक के खिलाफ अधिकारी द्वारा मंजूरी के लिए तीन महीने का समय तय होता है लेकिन इस मामले में पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।