चंडीगढ़। सेक्टर-9 में प्रॉपर्टी डीलर चमनप्रीत सिंह उर्फ चिन्नी की दिनदहाड़े हत्या और पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर में सोपू नेता जशन जवंधा पर फायरिंग की घटनाओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में होने वाले हार्ड कोर क्राइम को सुलझाने में चंडीगढ़ पुलिस पिछड़ती जा रही है जबकि पंजाब, हरियाणा और दिल्ली पुलिस की टीमें लगातार बड़ी सफलताएं हासिल कर रही हैं।
स्थिति यह बन गई है कि गैंगस्टरों, शूटरों और रंगदारी नेटवर्क से जुड़े मामलों में पड़ोसी राज्यों की पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार कर रही है जबकि चंडीगढ़ पुलिस ट्रैफिक चालान और नाकाबंदी के बाद प्रोडक्शन वारंट पर उन्हें लाकर पूछताछ और चार्जशीट दाखिल करने तक सीमित रह गई है।
एक दिसंबर 2025 को सेक्टर-26 में हुए पैरी हत्याकांड में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मुख्य शूटरों को गिरफ्तार किया जबकि चंडीगढ़ पुलिस के हाथ खाली रहे। इसके बाद 15 जनवरी को सेक्टर-19 में बिल्डर अंकित सदाना के घर पर फायरिंग और पांच करोड़ की रंगदारी के मामले में भी पंजाब पुलिस ने आरोपियों को दबोचा।
हाल ही में सेक्टर-9 में प्रॉपर्टी डीलर चिन्नी की हत्या के मामले में भी पंजाब की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने हरियाणा के कैथल में मुठभेड़ के बाद मुख्य आरोपियों राजन उर्फ पीयूष पहलवान और प्रीतम को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई ने एक बार फिर साफ कर दिया कि बड़े मामलों में दूसरे राज्यों की एजेंसियां ही अहम भूमिका निभा रही हैं।
उधर, पंजाब यूनिवर्सिटी में सोपू नेता जशन जवंधा पर हुई फायरिंग का मामला अब तक अनसुलझा है। घटना के कई दिन बाद भी आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। खास बात यह है कि 24 घंटे के भीतर शहर में दो बड़ी वारदात होने के बावजूद चंडीगढ़ पुलिस कुछ नहीं कर पा रही है।