पांच कांस्टेबलों द्वारा गैंगरेप और छेड़छाड़ मामले में नाबालिग पीड़िता अपने बयान से पलट गई है। इस बहुचर्चित मामले में पीड़िता पर मुकरने के लिए दबाव बनाए जाने की खबरें मामले में एफआईआर दर्ज होने के दिन से ही आ रही थीं।
अब मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी। मामला सामने आने के बाद पांचों आरोपी कांस्टेबल बर्खास्त कर दिए गए थे और बुड़ैल जेल में बंद हैं।
वीरवार को जिला अदालत में पांचों आरोपियों की मौजूदगी में पीड़िता ने सिर्फ एक आरोपी अक्षय की ही पहचान की। नाबालिग पीड़िता ने कहा कि वह कांस्टेबल अक्षय को जानती है और उससे शादी करना चाहती है।
अक्षय के साथ उसकी दोस्ती थी। पिछले साल 20 दिसंबर को धारा-164 के तहत जो बयान दर्ज हुए वे दबाव में आकर दिए थे।
किसने बदलवाए बयान
पीड़िता के वकील ब्रजेश्वर जसवाल के अनुसार लड़की पर पुलिस और आरोपियों की ओर से शुरू से ही दबाव था। जिस तरह से बयान के लिए पीड़िता को ले जाया गया, वह भी इसी ओर इशारा करता है।
सुबह 08:30बजे उनके मोबाइल पीड़िता के भाई का मैसेज आया कि बहन की तबीयत ठीक नहीं है। गवाही के लिए अगली तारीख ले लें। उन्हें बाद में पता चला कि पीड़िता की गवाही करवा दी गई है।
ऐसे ही दबाव के चलते पीड़िता 14 मार्च को घर से गायब हो गई थी और 16 मार्च को एक गुरुद्वारे में मिली थी। वकील के अनुसार अब अदालत से अपील की जाएगी कि वह धारा-164 के तहत हुए बयानों को आधार मानकर ही फैसला सुनाए।
पहले के बयान
19 दिसंबर को सेक्टर-11 थाने में 17 वर्षीय पीड़िता ने एफआईआर दर्ज कराई थी। पीड़िता के अनुसार कांस्टेबल अक्षय और सुनील ने उसे तथा उसके मां-बाप को मारने की धमकी देकर उससे कई बार दुराचार किया।
तीन अन्य कांस्टेबल हिम्मत, जगतार और अनिल ने भी उस पर संबंध बनाने के लिए दबाव डाला और छेड़छाड़ की। स्कूल से छुट्टी के बाद जब वह निकलती थी तो पुुलिस कांस्टेबल पीसीआर जिप्सी में उसका पीछा करते थे और रास्ते में उठाकर सुनसान जगह पर ले जाकर बलात्कार करते थे।