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चंडीगढ़ः कोशिश तो की मगर नहीं बनी बात...दिग्गज लौटे खाली हाथ, अब दिव्यांग खिलाड़ियों से आस

Mon, 03 Sep 2018 03:14 PM IST
संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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anjum mudgil
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कड़ी मेहनत और लगन के बावजूद कहीं कुछ ऐसी कसर रह गई, जिसकी वजह से ट्राइसिटी के अनुभवी खिलाड़ी बिना किसी मेडल के एशियन गेम्स 2018 से वापस लौट आए। यह वही खिलाड़ी हैं, जिनकी ‘सेल्फ’ चमकदार पदकों से सुशोभित है। लेकिन एशियन गेम्स में ट्राइसिटी के इन खिलाड़ियों की झोली में कुछ नहीं आया। वहीं पंजाब और हरियाणा के खिलाड़ियों ने शानदार खेल प्रतिभा का परिचय देते हुए गोल्ड, सिल्वर, बांज मेडल जीते हैं।
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इंडोनेशिया के जकार्ता में 18वीं एशियन गेम्स का आयोजन 18 अगस्त से 2 सितंबर तक किया गया। इसमें चीन 132 गोल्ड , 92 सिल्वर, 65 ब्रांज मेडल के साथ कुल 289 अंक लेकर अंक तालिका में पहले स्थान पर रहा। वहीं भारत 15 गोल्ड, 24 सिल्वर, 30 ब्रांज मेडल के साथ कुल 69 अंक लेकर 8वें स्थान पर रहा। ट्राइसिटी से एशियन गेम्स में शूटिंग प्लेयर अंजुम मोदगिल, गोल्फर आदिल बेदी, हैंडबॉल के पुरुष टीम में अतुल और महिला टीम में हिस्सा लिया। क्याकिंग एंड कैनोइंग प्लेयर सचिन कुमार, मंजीत सिंह, रविंदर, बजिंदर भी शामिल रहे।

शुरुआत अच्छी मगर बाद में पिछड़ गए आदिल बेदी
एशियन गेम्स में हिस्सा लेने वाले सबसे युवा आदिल बेदी पहले दो दिन बेहतर खेल दिखाते हुए दिखे। टूर्नामेंट के आखिरी राउंड तक आते आते विदेशी गोल्फर्स से पिछड़ने लगे। आखिरी में टॉप 15 में आकर आदिल का एशियन गेम्स का सफर खत्म हुआ। 17 वर्षीय विवेक हाई स्कूल के छात्र आदिल बेदी को इंडियन गोल्फ यूनियन (आईजीयू) की रैंकिंग में दूसरा स्थान हासिल है। एशियन गेम्म में मेडल का टारगेट लेकर चले थे, लेकिन सफ लता दूर तक नजर नहीं आई।
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एक प्वाइंट से रह गईं अंजुम मोदगिल
अंजुम मोदगिल देश की टॉप महिला शूटर की सूची में शुमार हैं। एशियन गेम्स में किसमत ने इस खिलाड़ी का साथ नहीं दिया। थ्री पीपी इवेंट में अंजुम ने हिस्सा लिया था, लेकिन मात्र एक प्वाइंट से क्वालीफाइंग राउंड के टॉप 8 शूटर खिलाड़ियों में जगह बनाने से चूक गई और इस प्रतियोगिता से बाहर हो गईं। क्वालीफाइंग राउंड के लिए 10 प्वाइंट चाहिए थे, लेकिन अंज़ुम मोदगिल 0.009 अंक ही बटोर सकी। एशियन गेम्स से बाहर होने के बाद अब अंजुम कोरिया में वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में हिस्सा ले रही हैं। यहां पर सोमवार को मुकाबला खेलना हैं।

हैंडबाल में लीग मैच ही खेला बेहतर
अतुल पुरुष टीम हैंडबाल टीम के स्थाई सदस्य के रूप में एशियन गेम्स में शामिल हुए। इस बार टीम अंक तालिका में 9वें स्थान पर रही। पिछले एशियन गेम्स में भारतीय पुरुष टीम 12वें स्थान पर रही थी। इस बार जकार्ता में जिस पूल में भारतीय टीम रही उसमें चीन, साउथ कोरिया, दक्षिण कोरिया, जैसे बेहतरीन टीमें शामिल थीं। भारत ने पहले लीग मैच में बेहतर किया, लेकिन इसके बाद नियंत्रण नहीं रख पाई।

हैंडबाल में महिला टीम के हाथ भी निराशा
खिला देवी महिला टीम हैंडबाल टीम के स्थाई सदस्य के रूप में एशियन गेम्स में शामिल हुईं। इसमें महिला टीम 9वें स्थान पर रहीं। पिछले एशियन गेम्स में भारतीय महिला टीम 13वें स्थान पर थी। इस तरह इस बार चौथे पायदान की छलांग लगा र्पाइं। खिला देवी मूल रूप से हिमाचल की रहने वाली हैं, लेकिन पढ़ाई के लिए चंडीगढ़ आई थीं और यहीं से हैंडबाल की ट्रेनिंग ली।

ड्रैगन बोट इवेंट में पल्ले पड़ी हार
सचिन कुमार, मंजीत, रविंदर, बजिंदर ने एशियन गेम्स में कैनो पोल में ड्रैगन बोट इवेंट में हिस्सा लिया था। इनमें 1000 मीटर रेस में 5वें स्थान पर, 200 मीटर रेस में 7वें स्थान, 500 मीटर रेस में 9वें स्थान पर रहे। सचिन कुमार सोनीपत के रहने वाले है। कैनोइंग के इंटरनेशनल प्लेयर हैं। इन्होंने एशियन गेम्स के लिए चंडीगढ़ की सुखना लेक पर लगे कैंप में अभ्यास किया था। वहीं दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए एशियन गेम्स का दूसरा फेज अक्तूबर में खेला जाना है। ट्राइसिटी के इन दिव्यांग खिलाड़ियों से उम्मीदें बंधी हुई हैं। इनमें पैरा बैडमिंटन प्लेयर संजीव कुमार, टेबल टेनिस प्लेयर मुकेश कुमार, पूनम शामिल हैं।

इनसे अभी उम्मीदें बाकी...
संजीव कुमार पैरा बैडमिंटन के शानदार खिलाड़ी हैं। संजीव मूल रूप से अबोहर फाजिल्का के रहने वाले हैं, लेकिन बैडमिंटन की बारीकियां इन्होंने चंडीगढ़ से ही सीखी हैं। एशियन गेम्स के लिए चयनित हो चुके हैं। इन दिनों सेक्टर-43 के स्पोर्ट्स कांपलेक्स के बैडमिंटन सेंटर में अभ्यास में जुटे हुए हैं। यहां पर अपने कोच सुरेंद्र महाजन और मल्टी स्पेशलिस्ट कोच भुवन सेठी से एडवांस ट्रनिंग ले रहे हैं। बिना एडवांस स्पोर्ट्स व्हील चेयर पर कई इंटरनेशनल स्तर देश के लिए पिछले कई सालों से मेडल जीत रहे हैं। अब इन्हें किसी एनजीओ ने एडवांस स्पोर्ट्स व्हील चेयर दी है।

मुकेश कुमार पैरा टेबल टेनिस के खिलाड़ी हैं। चंडीगढ़ में रहते हैं। टेबल टेनिस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए रेलवे प्लेटफार्म पर इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान एक बच्चा रेलवे ट्रैक पर पहुंच गया। मुकेश की नजर इस बच्चे पर पड़ी और वह उसे बचाने के लिए ट्रैक पर पहुंच गए। इतने में वहां से रेल गुजरी। बच्चे को तो इन्होंने बचा लिया, लेकिन इस हादसे में अपना एक पांव गंवा बैठे। इसके बाद मुकेश ने हिम्मत नहीं हारी और टेबल टेनिस में लगातार अपना मुकाम बनाते गए। इन्हें राष्ट्रपति की ओर से जीवन रक्षा पत्र, स्टेट अवार्ड, नेशनल अवार्ड मिल चुका है। इन दिनों एशियन गेम्स के लिए तैयारी कर रहे हैं।

पूनम पैरा टेबल टेनिस की महिला खिलाड़ी हैं। बचपन में पोलियों से एक पांव गंवा बैठी। पढ़ाई के साथ साथ टेबल टेनिस खेलना शुरू किया। धीरे-धीरे इस खेल में निपुण हो गईं और आज नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर पदक जीतकर देश का नाम रौशन करने में लगी हुई हैं। टेबल टेनिस में शहर से एकमात्र महिला खिलाड़ी हैं, जिनका चयन एशियन गेम्स के लिए हुआ है। वह इन दिनों सेक्टर-27 के टेबल टेनिस हाल में सुबह और शाम अभ्यास करने में जुटी हुई हैं।
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