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Chandigarh: एक भी आंख न जाए बेकार, नेत्रदान से मिली कॉर्निया का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर रहा पीजीआई

Sat, 09 Sep 2023 02:01 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पीजीआई एडवांस आई सेंटर की डॉ. पारुल गुप्ता ने बताया कि नेत्र संबंधी विकार में सिर्फ कॉर्निया प्रत्यारोपण से जुड़ी ही समस्या नहीं होती है। कई मरीजों की आंख में चोट, दुर्घटना, बीमारी के कारण भी कॉर्निया में विकार हो जाता है। कॉर्निया को अगर प्रत्यारोपित नहीं किया जाता तो उसके ठीक भाग का उपयोग इन मरीजों के इलाज में किया जाता है।
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नेत्रदान
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विस्तार
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नेत्रदान कर दुनिया से जाने के बाद भी किसी के अंधेरे जीवन में रोशनी बिखेरी जा सकती है। नेत्रदान की एक-एक कॉर्निया बहुमूल्य है। इसका शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित कराने के लिए विशेषज्ञ लगातार नए-नए तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं। पीजीआई के एडवांस आई सेंटर के विशेषज्ञ हर कॉर्निया का उपयोग करने में जुटे हैं। 
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उनका कहना है कि नेत्रदान से मिली कॉर्निया में किसी तरह की खराबी होने पर भी उसे फेंका नहीं जाता। उसका मरीजों के इलाज में अलग-अलग तरह से उपयोग किया जा रहा है। मुख्य रूप से थेरेप्यूटिक यानी कॉर्निया प्रत्यारोपण के बजाय उसके अलग-अलग स्तर का क्षमता के अनुसार मरीज पर उपयोग किया जा रहा है ताकि नेत्रदान का उद्देश्य सार्थक हो सके।

पीजीआई एडवांस आई सेंटर की डॉ. पारुल गुप्ता ने बताया कि नेत्र संबंधी विकार में सिर्फ कॉर्निया प्रत्यारोपण से जुड़ी ही समस्या नहीं होती है। कई मरीजों की आंख में चोट, दुर्घटना, बीमारी के कारण भी कॉर्निया में विकार हो जाता है। ऐसे में प्राप्त कॉर्निया को अगर प्रत्यारोपित नहीं किया जाता तो उसके ठीक भाग का उपयोग इन मरीजों के इलाज में किया जाता है। इससे थेरेप्यूटिक उपयोग का भी नेत्र ज्योति देने में अहम रोल है। उन्होंने बताया कि नेत्रदान के लिए आप 24 घंटे टोल फ्री नंबर 1919 भी डायल कर सकते हैं।
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ऐसे काम आता है कॉर्निया 
फोटोथेरेप्यूटिक केराटेक्टॉमी (पीटीके) एक एक्साइमर लेजर सर्जिकल प्रक्रिया है, जो कॉर्निया से खुरदरापन या बादल को हटा देती है। इस प्रक्रिया का उपयोग सतही कॉर्नियल निशानों को हटाने या बार-बार होने वाले उपकला दोषों के इलाज के लिए किया जाता है। दूसरे शब्दों में, लेज़र का उपयोग कॉर्नियल ऊतक की थोड़ी मात्रा को हटाने के लिए किया जाता है, जो रोगी के लिए समस्या पैदा कर रहा है। उस जगह पर नेत्रदान से प्राप्त कार्निया का भाग लगा दिया जाता है।

ये नहीं कर सकते नेत्रदान
  • एड्स या एचआईवी
  • सक्रिय वायरल हेपेटाइटिस
  • सक्रिय वायरल एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन)
  • रैबीज, रेटिनोब्लास्टोमा (आंख का कैंसर)
  • सेप्टीसीमिया (रक्त प्रवाह में बैक्टीरिया)
  • सक्रिय ल्यूकेमिया (रक्त कैंसर का एक प्रकार)।

नेत्रदान से जुड़े ये तथ्य आप भी जान लें
  • आंखें किसी की मृत्यु के बाद ही दान की जा सकती हैं।
  • मौत के 4 से 6 घंटे के अंदर आंखें निकालनी होती हैं।
  • दाता को नेत्र बैंक में ले जाने की आवश्यकता नहीं है।
  • नेत्र बैंक के अधिकारी बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के दाता के घर जाएंगे।
  • आंख निकालने की पूरी प्रक्रिया से अंतिम संस्कार में देरी नहीं होती, क्योंकि इसमें केवल 20 से 30 मिनट लगते हैं।
  • किसी भी उम्र के व्यक्ति का नेत्रदान किया जा सकता है।
  • आंखों को हटाने से चेहरा खराब नहीं होता है।
  • परीक्षण के लिए दाता के शरीर से एक छोटी मात्रा (10 मिली) रक्त लिया जाता है।
  • नेत्र बैंक कर्मियों की ओर से पहले आंखों का मूल्यांकन किया जाता है और प्रशिक्षित कॉर्नियल सर्जन द्वारा प्रत्यारोपण के लिए कॉर्निया का उपयोग किया जाता है।
  • आई बैंक गैर-लाभकारी संगठन हैं। आप आंखें नहीं खरीद सकते। प्रतीक्षा सूची के अनुसार मरीजों को बुलाया जाता है।
  • दाता और प्राप्तकर्ता दोनों की पहचान गोपनीय रखी जाती है।

पीजीआई और जीएमसीएच 32 में कॉर्निया प्रत्यारोपण की स्थिति
साल                   पीजीआई   प्राप्त/उपयोग                जीएमसीएच 32 प्राप्त/उपयोग

2013                               306/251                                     200/100
2014                               318/273                                     223/104
2015                               546/393                                     243/95
2016                               660/436                                    267/102
2017                                778/470                                    264/107
2018                                861/470                                    317/125
2019                                674/425                                    312/103
2020                                224/157                                    118/20
2021                                444/286                                     13/3
2022                                456/367                                     58/24
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नेत्रदान से मिलने वाली कॉर्निया के शत प्रतिशत उपयोग का प्रयास किया जाता है, जो कॉर्निया क्षतिग्रस्त होने के कारण प्रत्यारोपित करने योग्य नहीं होती है उसका हम थेरेप्यूटिक उपयोग करते हैं। -डॉ एसएस पांडव, प्रमुख पीजीआई एडवांस आई सेंटर
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