डॉ. नवीन ने बताया कि रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत अस्पताल के आईसीयू और हाई डिपेंडेंसी यूनिट के डॉक्टरों के मोबाइल फोन कंट्रोल रूम से कनेक्ट कर दिए गए हैं। कंट्रोल रूम में लगाए गए अलग-अलग मॉनिटर पर मरीजों का स्टेटस डिस्प्ले होता रहता है। कंट्रोल रूम में लगाए गए मॉनिटर प्रत्येक मरीज के मॉनिटर से कनेक्ट हैं, जो मरीज के पल-पल की रिपोर्ट मोबाइल और कंट्रोल रूम में अपडेट करता रहता है।
24 घंटे वरिष्ठ डॉक्टरों की नजर
कोरोना के मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या से अस्पतालों में विशेषज्ञों की कमी सबसे बड़ी परेशानी के रूप में सामने आ रही है, लेकिन रिमोट मॉनिटरिंग तकनीक ने इस समस्या का पूर्ण रूप से समाधान तलाश लिया है। इस तकनीक की मदद से रेजिडेंट डॉक्टर व उनके वरिष्ठ डॉक्टर लगातार अपने मोबाइल के जरिए मरीजों की आंतरिक गतिविधि पर नजर बनाए रखते हैं। इसके जरिए मरीज का बीपी, हार्ट बीट, पल्स, ऑक्सीजन स्तर जैसे सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पल-पल की जानकारी अपडेट होती रहती है।
कोविड-19 के आईसीयू में लगे कैमरे रिमोट मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम से जुड़े हुए हैं। इससे बेहद गंभीर मरीजों के मूवमेंट पर भी हर पल नजर रखी जा रही है। इतना ही नहीं मरीज की सांस लेने की प्रक्रिया भी रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए डॉक्टरों की नजर में रहती है। जरा सा भी हेरफेर होने पर डॉक्टर तत्काल उस मरीज तक पहुंच जाते हैं।
पीजीआई के युवा डॉक्टरों की टीम ऊर्जा और जोश से भरी हुई है और लगातार नई-नई तकनीक ईजाद कर मरीजों का इलाज सुगम बना रही है। कोविड काल में ऐसे तमाम मौके सामने आए जब डॉक्टरों ने अपनी समझदारी से जटिल से जटिल स्थिति को बेहद आसान बनाकर मरीजों की जान बचाई। ऐसे युवा योद्धाओं में से एक हैं डॉ. नवीन नायक, जो आईसीयू में रिमोट मॉनिटरिंग तकनीक का प्रयोग कर मरीजों और डॉक्टरों के बीच एक मिनट का भी गैप नहीं होने दे रहे। -प्रो. जीडी पुरी, डीन एकेडमी पीजीआई व कोविड प्रबंधन के चेयरमैन