पे बैंड और पदनाम को लेकर पीजीआई नर्सिंग टीचर्स एसोसिएशन ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) में केस दायर किया है। ट्रिब्यूनल ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी कर 13 जुलाई को अपना पक्ष रखने को कहा है। इससे पहले भी एसोसिएशन की ओर से मामले में केस दाखिल किया गया था। उस पर कैट से उन्हें राहत मिली थी। लेकिन प्रतिवादी पक्ष की ओर से उस आदेश का पालन न किए जाने पर एनटीए ने अवमानना याचिका दाखिल की थी।
इस पर ट्रिब्यूनल ने प्रतिवादी पक्ष को 12 जुलाई तक आदेशों का अनुपालन करने को कहा है। एनटीए की ओर से दाखिल याचिका में उन्होंने पीजीआई प्रशासन के 12 अगस्त 2016 के आदेश को चुनौती दी थी। इसमें पीजीआई ने उनकी पदनाम क्लीनिकल इंस्ट्रक्टर से सिस्टर टयूट्र करने की मांग को खारिज कर दिया था।
एनटीए के अनुसार 1997 में पीजीआई गवर्निंग बॉडी ने एक प्रस्ताव पास कर उनके सिस्टर ट्यूटर के पद को बदलकर क्लीनिकल इंस्ट्रक्टर कर दिया था। बाद में तकनीकी दिक्कत सामने आने पर पीयू से इसकी एफिलेशन समाप्त कर दी गई और पीजीआई से ही इसे मान्यता दे दी गई।
तीसरे से लेकर पांचवें वेतन आयोग तक तो उन्हें क्लीनिकल इंस्ट्रक्टर के तौर पर समान सैलरी मिलती रही, लेकिन छठे वेतन आयोग के बाद से दिल्ली एम्स की नर्सेज को पे बैंड 3 और उन्हें 2 दिया गया। जबकि उनके अनुसार दिल्ली एम्स की नर्सेज से वह अधिक योग्यता रखती हैं। इस आधार पर उन्होंने कैट से पदनाम क्लीनिकल इंस्ट्रक्टर से सिस्टर ट्यूटर करने और पे बैंड 4800 से 5400 रुपये करने की अपील की है। कैट ने उनकी याचिका पर केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय, गृह मंत्रालय, चेयरमैन गवर्निंग बॉडी पीजीआई, डायरेक्टर स्वास्थ्य एवं परिवार मंत्रालय और डायरेक्टर पीजीआई को 13 जुलाई के लिए नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है।