चंडीगढ़ पीजीआई ने क्लोज्ड लूप एनेस्थीसिया डिलिवरी सिस्टम डिवाइस तैयार किया है। इस डिवाइस की मदद से मरीज के सर्जरी के दौरान बेहोशी के डॉक्टर के बजाय मशीन से कमांड दी जा सकेगी।
खास बात यह है कि इस डिवाइस में लगे सेंसर के जरिए बेहोश मरीज की पल-पल की जानकारी भी ली जा सकेगी। इस डिवाइस का देश में पेटेंट हो चुका है। जल्द मार्केट में उतारने की तैयारी है। पीजीआई ने डिवाइस का क्लीनिकल ट्रायल पूरा कर लिया है। यह डिवाइस मरीज के लिए बेहोशी की दवा की डोज भी तय करेगी। वहीं, सर्जरी के दौरान बेहोश मरीज के शरीर के अंदर होने वाले बदलाव का संकेत देने के साथ तत्काल नियंत्रित करने में भी मदद करेगी।
पीजीआई के बायो मेडिकल इंस्ट्रूमेंट्स एंड डिवाइस लैब में बनाई गई क्लोज्ड लूप एनेस्थीसिया डिलिवरी सिस्टम डिवाइस के बारे में लैब के प्रभारी व एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के डॉ. जोसफ एल मैथ्यू ने बताया कि विशेषज्ञ की जगह मशीन पूरा काम करेगी। यह सेंसर के माध्यम से मरीज की स्थिति को देखकर पल-पल का अपडेट देगी, जिससे सर्जरी के दौरान बेहोशी के डॉक्टर को ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं होगी। वहीं, अब तकनीक की मदद से बेहोशी जैसी जटिल स्थिति में मनुष्य की बजाय मशीन के जरिए काम करना और आसान होगा। क्योंकि इसमें एरर होने की गुंजाइश बहुत कम होगी। इसके साथ ही सर्जरी के दौरान मरीज में किसी भी तरह की कंप्लीकेशन होने पर तत्काल जानकारी मिलने के साथ बचाव भी होगा।
क्लीनिकल ट्रायल पूरा, अब मार्केट में उतारने की तैयारी
डॉ. जोसफ एल मैथ्यू ने बताया कि कुछ समय पहले डिवाइस का क्लीनिक ट्रायल पूरा हुआ है। एक निजी कंपनी से समझौता कर डिवाइस बनाने के लिए दिया गया है। जल्द ही इस डिवाइस को पीजीआई अपने मरीजों पर उपयोग करने के साथ मार्केट में भी उतारेगा ताकि अन्य संस्थानों और अस्पतालों के मरीजों को भी इसका लाभ मिल सके।
डिवाइस इस तरह करेगी काम
- एनेस्थीसिया में दवाओं का इस्तेमाल को मरीज़ की उम्र, ऊंचाई, और वज़न के मुताबिक़ दिया जाता है, यह डिवाइस ये भी मॉनिटर करेगी।
- अगर मरीज में बेहोशी की दवा की ज्यादा डोज चली जाए तो उसे भी मशीन से नियंत्रित किया जा सकेगा।
- एनेस्थीसिया लेने के बाद कुछ देर के लिए मरीज़ कोमा जैसी हालत में पहुंचता है। यह डिवाइस मरीज को सुरक्षित तौर पर उससे बाहर निकालने का भी काम करेगी।
- सर्जरी के दौरान मरीज के शरीर के अंदर होने वाली गतिविधियों को भी ट्रेस करेगी।