मरीजों पर हुए शोध पर चर्चा करते हुए पीजीआई की डॉक्टर ने बताया कि कैसे बदलते लाइफ स्टाइल ने लोगों को मरीज बना दिया है? पीजीआई के एनस्थीसिया विभाग और पेन क्लीनिक की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बबीता घई के मुताबिक, लोगों के बदलते लाइफ स्टाइल के चलते पीठ दर्द का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।
पीड़ितों में युवाओं की तादाद भी बढ़ने लगी है। क्योंकि युवा वर्ग में खेलकूद की गतिविधियां कम हो गई हैं। वह अपना ज्यादा समय टीवी देखने या मोबाइल को देने लगे हैं।
वहीं, कार्यालय हो या घर लोग सही तरीके से कुर्सी और सोफे पर नहीं बैठते जिसकी वजह से वह पीठ दर्द के शिकार हो जाते हैं और उन्हें कार्यालय से लंबी छुट्टी लेनी पड़ती है। देश में 50 प्रतिशत लोग पीठ दर्द जैसी समस्या से परेशान हैं।
कई बार तो लोगों को लगता है कि यह दर्द उनकी जान ले लेगा। उन्होंने यह जानकारी संस्थान में मरीजों पर हुए शोध के आकड़ों को साझा करते हुए दी। उन्होंने बताया कि 20 प्रतिशत मरीजों में यह रोग गंभीर पाया गया। वहीं कुछ लोगों में यह रोग चोट लगने, भारी सामान उठाने, विटामिन डी की कमी के कारण भी पाया गया है।
विटामिन डी की कमी के कारण पीठ दर्द बढ़ा
देश में विटामिन डी की कमी के कारण पीठ दर्द के ज्यादा मामले सामने आए हैं। शोध में सामने आया कि 86 प्रतिशत मरीजों में विटामिन डी की कमी पाई गई। 45 प्रतिशत में विटामिन डी की ज्यादा कमी और 3 प्रतिशत मरीज ऐसे पाए गए जिनमें विटामिन डी के तय मात्रा से बहुत ज्यादा कम होने पर सही मात्रा का पता नहीं चला। उन्होंने बताया कि पीजीआई में 80 प्रतिशत मरीज पीठ दर्द के आते हैं। इसके बाद गर्दन, हाथ, बाजुओं एवं मुंह के दर्द के मरीज आते हैं।
दो घंटे से तीन घंटे लें धूप
डॉक्टर घई के मुताबिक इंसान हर रोज दो घंटे भी धूप लेता है तो शरीर में विटामिन डी मात्रा को संतुलित किया जा सकता है। सूर्य की रोशनी से विटामिन डी की कमी दूर होती है। दवाओं से विटामिन डी की कमी को दूर नहीं किया जा सकता है।
नई एडवाइजरी के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को देंगे सलाह
डॉक्टर बबिता ने बताया कि पीजीआई की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को विटामिन डी के बारे में नई गाइड लाइन को जारी करने के लिए पत्र भेजा जाएगा ताकि लोगों को इस रोग से निजात दिलाई जा सके।
5 से 10 प्रतिशत लोगों को सर्जरी की जरूरत
पीठ दर्द के 5 से 10 प्रतिशत केसों में सर्जरी कराने की जरूरत पड़ती है। शेष में पेन क्लीनिक में व्यायाम एवं दवाओं से उपचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पीजीआई में उनकी पेन क्लीनिक में सप्ताह में दो बार ऐसे मरीज आ रहे है जो लंबी अवधि तक मोबाइल फोन पर चैटिंग एवं बातचीत करते हैं। गर्दन दर्द के साथ सिर दर्द होता है। उन्होंने कहा कि लेट कर टीवी देखने वालों को भी पीठ दर्द की शिकायत होती है। महिलाओं द्वारा हील वाले सैंडल डालने से रीढ़ की हडडी पर दबाव बढ़ जाता है और वे बैक पेन की शिकार हो जाती हैं।
बच्चों के वजन से 10 फीसदी कम भार हो बैग का
स्कूल बैग के बढ़ते बोझ से बच्चों में पीठ दर्द बढ़ रहा है। स्कूली बच्चों का स्कूल बैग बच्चे के वजन से 10 प्रतिशत कम होना चाहिए। लेकिन आमतौर पर बैग का भार ज्यादा होता है।