चंडीगढ़ के लोग यूपी के बाराबंकी गारबेज प्लांट का विरोध कर रहे हैं। इसके पीछे बेहद चौंकाने वाली वजह बताई जा रही है। लोगों के मुताबिक, बाराबंकी में जहां पर कूड़ा निस्तारण प्लांट बना है वहां शहर की आबादी है। वहां के लोग कहते हैं कि जब बिजली संयंत्र चलता है तो लोगों के घर हिलने लगते हैं।
इसके चलते स्थानीय निवासी बिजली संयंत्र का विरोध कर रहे हैं। इसके लिए एक बार धरना प्रदर्शन भी हो चुका है। मालूम हो कि चंडीगढ़ नगर निगम की डड्डूमाजरा में बने वर्तमान प्लांट को बंद करके बिजली बनाने वाला प्लांट लगाने की योजना है। नगर निगम के कमिश्नर बी पुरुषार्था और मेयर अरुण सूद इसकी स्टडी करने गए हुए हैं।
ढाई की जगह एक मेगावाट बिजली ही पैदा हो रही
बाराबंकी प्लाट में प्रतिदिन ढाई मेगावट बिजली बनाई जा सकती है। लेकिन फिलहाल वहां प्रतिदिन 50 टन कूड़ा प्रोसेस कर एक मेगावट बिजली पैदा की जा रही है। जबकि प्लांट में 250 टन कूड़ा प्रोसेस किया जा सकता है।
इस नजरिए से देखें तो चंडीगढ़ के गारबेज प्लांट से रोजाना अधिकतम ढाई मेगावाट बिजली पैदा की जा सकती है क्योंकि वर्तमान में शहर में 350 टन कूड़ा निकल रहा है और 250 टन कूड़ा गारेवेज प्लांट में और 100 टन कूड़ा डंपिंग ग्राउंड में डाला जा रहा है। आबादी के बीच में
साल 2013 से चल रहा है प्लांट
बाराबंकी में यह प्लांट सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना के तहत 11 अप्रैल 2013 से चल रहा है। दस बीघे में यह प्लांट बना हुआ है। बिजली संयंत्र से यहां आने वाले कूड़े से प्रतिदिन ढाई मेगावट बिजली बनाई जा सकती है। हालांकि इस समय प्लांट में एक मेगावट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है जिसका उपयोग प्लांट के संचालन में ही किया जा रहा है।
अभी बेची नहीं जा रही बिजली
कूड़ा निस्तारण प्लांट में बनने वाली बिजली को अभी बाहर नहीं बेची जा रही है। लेकिन जल्द ही जब प्रतिदिन ढाई मेगावट बिजली बनेगी तो बिजली बेचने से सरकार को काफी फायदा होगा। प्लांट के देखरेख की जिम्मेदारी एक निजी संस्था को दी गई है।
जाने के लिए कमेटी सदस्यों से नहीं ली राय
कूड़े से बिजली बनाने वाले प्लांट को लगाने के लिए मेयर अरुण सूद ने एक कमेटी का गठन किया है, जिसमे भाजपा पार्षद सतप्रकाश अग्रवाल और कांग्रेस पार्षद सुभाष चावला भी शामिल हैं। पूर्व मेयर सुभाष चावला ने मेयर और कमिश्नर के बाराबंकी जाने पर कहा कि इस संबंध में कमेटी के किसी भी सदस्य से कोई राय नहीं ली गई। उनका कहना है कि जब कमेटी नया प्लांट लगाने के लिए ही गठित की गई थी तो कम से कम सदस्यों की राय तो लेते।
कूड़ा निस्तारण प्लांट के बिजली संयंत्र से इस समय एक मेगावट बिजली प्रतिदिन बनाई जा रही है। प्लांट की क्षमता एक दिन में ढाई सौ टन कूड़ा डंप करने व ढाई मेगावट बिजली बनाने की है। प्लांट में कोई कमी नहीं है, सभी कार्य सही तरीके से हो रहे हैं।
- नवनीत मिश्रा, मैनेजर, कूड़ा निस्तारण प्लांट, बाराबंकी