चंडीगढ़। शहर में घर-घर से कचरा उठाने और अलग-अलग कचरा लेने की प्रक्रिया पर अब सवाल उठने लगे हैं। ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने निगम पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जो काम पिछले 30 साल में चंडीगढ़ नहीं कर सका, उसे पंचकूला ने 16 साल में कर दिखाया।
कमेटी के अध्यक्ष दयाल कृष्ण ने कहा कि पंचकूला बायोमाइनिंग प्रोसेस विधि से कचरे को समाप्त कर रहा है। बायोमाइनिंग प्रोसेसिंग प्लांट में 1 दिन में 2000 से 3000 मीट्रिक टन कचरे को समाप्त कर दिया जाएगा मगर जो बायोमाइनिंग प्रोसेसिंग प्लांट चंडीगढ़ में लगा है, उसे लगभग 1 साल हो गया है और वहां पर अभी भी 30 साल पुराना कचरा डंप पड़ा है। उस कंपनी ने भी वादा किया था कि वह प्रतिदिन 1650 मीट्रिक टन कचरा सेग्रीगेट कर समाप्त कर देंगे, लेकिन कंपनी के काम को देखकर लग रहा है कि अगले 10 साल में भी यह समस्या समाप्त नहीं होगी। प्लांट एक दिन चलता है तो कई दिन बंद रहता है। डंपिंग ग्राउंड की ऊंचाई 1 इंच भी कम नहीं हुई बल्कि दिन प्रतिदिन डंपिंग ग्राउंड का आकार बढ़ता जा रहा है। प्लांट के उद्घाटन के समय कई वादे किए गए थे, लेकिन वह भी खोखले ही निकले।