लॉकडाउन में शादी, बाद में नहीं मिले पति-पत्नी के विचार
शिप्रा बंसल ने बताया कि लॉकडाउन में कुछ लोगों ने खर्चा कम होने के चलते शादियां कर दीं। बाद में जब पति-पत्नी के विचार नहीं मिले या शादी में किसी मनमुटाव के कारण रिश्ते टूट गए या दुल्हनों की विदाई ही नहीं कराई गई। ऐसे पांच मामले हमारे सामने आए। फिलहाल इन मामलों में सुलह कराई गई और सभी लोग खुशी से अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
महिला आयोग बनना जरूरी : सगीना वलयाट
महिला अधिवक्ता सगीना का कहना है कि चंडीगढ़ में महिला आयोग का बनना बहुत जरूरी है क्योंकि कुछ मामलों में महिलाएं घर पर खुलकर बात नहीं कर पाती हैं और पुलिस में मामले को ले जाना नहीं चाहती हैं। ऐसे में महिलाओं को काउंसलिंग की जरूरत होती है। सही जगह और सही समय पर काउंसलिंग हो तो कई परिवार टूटने से बच सकते हैं।
ट्रांसजेंडरों के साथ भी हिंसा कम नहीं : शिप्रा बंसल
समाजसेवी शिप्रा बंसल ने बताया कि काउंसिलिंग के दौरान ट्रांसजेंडरों की भी समस्याएं सामने आईं। उनका कहना है कि ट्रांसजेंडर बोर्ड कोई कार्रवाई करता नहीं और यह लोग लॉकडाउन के दौरान घर से बाहर जा नहीं सकते थे। शिप्रा बंसल ने बताया कि यह मंच एक छोटे स्तर से शुरू किया था। आज हमारे पास कई शहरों से मामले आ रहे हैं। जिसे अपने स्तर पर सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं।
अक्सर देखने को मिलता है लोग एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने लगते हैं। इस परिस्थिति में लोगों को अपना नजरिया बदलना होगा क्योंकि जब एक दूसरे के प्रति नजरिया बदलेगा तो गलती कम अच्छाई ज्यादा दिखेगी। वहीं, आपसी कलह से बचने के लिए सकारात्मक सोच की आवश्यकता है। अपने आप को व्यस्त रखें और जो हमारे पास है, उसमें सकारात्मकता खोजने का प्रयास करें। योग, मेडिटेशन व व्यायाम करने से मन और मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा आती है। हालांकि ऐसा नहीं है कि यह मामले अभी दिखने शुरू हुए हैं। यह तो काफी पहले से चल रहा है, लेकिन लॉकडाउन में यह सामने आने लगे। पहले लोगों को अपने स्तर पर इसे सुधारना चाहिए अथवा परिवार के लोगों की मदद लेनी चाहिए। जब ऐसी परिस्थिति न हो तो विशेषज्ञ की मदद लेकर काउंसलिंग करवानी चाहिए। -प्रो. सीमा विनायक, विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग, पीयू