डड्डूमाजरा में लगाया जाना है बड़ा वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने एनटीपीसी का दिया था सुझाव
यूटी ने किया संपर्क, जवाब मिला- वाराणसी में मार्च में शुरू होगा प्लांट, उसकी सफलता के बाद चंडीगढ़ में शुरू करेंगे काम
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। डड्डूमाजरा में लगने वाले 550 टीडीपी के इंटिग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (आईएसडब्ल्यूएम) फैसिलिटी के लिए वेस्ट-टू-चारकोल (अपशिष्ट से कोयला) टेक्नोलॉजी पर चंडीगढ़ काम कर रहा है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के निर्देश पर निगम ने नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनटीपीसी) से संपर्क किया है। निगम को जवाब मिला है कि उन्होंने वाराणसी में एक वेस्ट-टू-चारकोल प्लांट स्थापित किया है, जिसके मार्च में शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद एक जॉइंट वेंचर बनाकर चंडीगढ़ के प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जाएगा।
नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि एनटीपीसी की ओर से शुरू किया गया शहरी कचरा से कोयला बनाने वाला प्लांट देश में कचरे से कोयला बनाने की तकनीक का पहला उदाहरण है। रमनाघाट स्थित प्लांट में रोज 600 मीट्रिक टन शहर के कचरे को 200 मीट्रिक टन कोयले में परिवर्तित करने की क्षमता है। फरवरी 2024 में एनटीपीसी की ओर से स्थापित और उद्घाटन किए गए प्लांट में परीक्षण प्रक्रिया जारी है। फिलहाल यह प्लांट प्रतिदिन 50 मीट्रिक टन कचरे को हरित कोयले में बदल रहा है। मार्च में यह पूरी तरह से काम करने लगेगा। चंडीगढ़ में भी बड़ा वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट लगाया जाना है, जिसके लिए निगम ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के निर्देश पर एनटीपीसी से संपर्क किया था। एनटीपीसी की ओर से नगर निगम को हाल ही में जवाब मिला है कि उन्होंने वाराणसी में वेस्ट-टू-चारकोल प्लांट स्थापित किया है, जो मार्च में पूरी क्षमता से संचालित होने की उम्मीद है। इसके बाद एनटीपीसी और चंडीगढ़ नगर निगम मिलकर इस तकनीक को चंडीगढ़ में लागू करेंगे। इस प्लांट की सफलता पर ही निर्भर करेगा कि चंडीगढ़ में वैसा ही प्लांट लगेगा या नहीं। ऐसे में अब निगम वाराणसी के प्लांट के शुरू होने का इंतजार कर रहा है।
वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के लिए ज्यादा कूड़े की होती है जरूरत, चंडीगढ़ में है कम
कुछ महीने पहले केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल चंडीगढ़ पहुंचे थे। उन्होंने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में कहा था कि चंडीगढ़ में वेस्ट मैनेजमेंट पर काफी काम हो रहा है। डड्डूमाजरा में जल्द ही कोई प्रोसेसिंग प्लांट लगाना होगा ताकि डंपिंग ग्राउंड में नया कूड़ा न गिराया जाए। अगर साथ-साथ कूड़ा प्रोसेस होता रहे तो किसी को कोई समस्या नहीं होगी। उन्होंने कहा था कि वेस्ट टू एनर्जी प्लांट के लिए बहुत सारा कूड़ा प्लांट को चाहिए जो यहां नहीं है लेकिन वेस्ट टू चारकोल बनाने की एक एनटीपीसी की टेक्नोलॉजी है। उन्होंने कहा था कि कचरे को चारकोल में बदलने के लिए एनटीपीसी के साथ संभावित साझेदारी पर भी विचार किया जा रहा है और चंडीगढ़ में एक वेस्ट-टू-चारकोल यूनिट स्थापित करने की योजना है।
15 साल के लिए प्लांट लगाने की योजना
सेक्टर-25 स्थित मौजूदा प्रसंस्करण संयंत्र की स्थापना 2008 में जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड की ओर से 30 वर्षों के लिए बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर के आधार पर की गई थी। कंपनी पूरे कचरे को प्रोसेस करने में विफल रही, इस कारण डड्डूमाजरा के डंपिंग ग्राउंड पर कचरे का पहाड़ बन गया। कानूनी लड़ाई और काफी खींचतान के बाद निगम ने जून 2020 में प्लांट को कब्जे में ले लिया। इसके बाद निगम ने आईआईटी-रुड़की से प्लांट की जांच कराई। आईआईटी-रुड़की ने देखा कि सेक्टर-25 प्लांट की सभी मशीनें पुरानी हो चुकी हैं। उन्होंने सूखे और गीले कचरे के प्रबंधन के लिए आधुनिक 500 टन प्रतिदिन (टीपीडी) संयंत्र स्थापित करने की सिफारिश की थी। इसलिए अब 550 टीडीपी का नया वेस्ट-टू-चारकोल प्लांट लगाने का प्रस्ताव लाया गया है, जो 15 साल के लिए होगा।