देश की इकलौती प्लांड सिटी चंडीगढ़ देश की टॉप-20 स्मार्ट सिटी की सूची से बाहर हो गई है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने स्मार्ट सिटी बनाए जाने वाले 20 शहरों की जो सूची जारी की है उससे सब हैरत में हैं।
इस सूची में चंडीगढ़ 24वें स्थान पर है। हर किसी का यही सवाल है कि आखिर कैसे इतने दावों और घोषणाओं के बाद चंडीगढ़ टॉप-20 में भी जगह नहीं बना पाया। कयास यह लग रहे थे कि टॉप-5 स्मार्ट सिटी में चंडीगढ़ का नाम आना तय है।
यह हुआ नुकसान
चुने गए पहले 20 शहरों को पहले दो साल 200-200 करोड़ रुपये और बाद में तीन साल तक 100-100 करोड़ रुपये मिलेंगे। यानी पांच सालों में 700 करोड़ रुपये का बजट विकास केलिए मिलेगा। इस बजट से 24 घंटे बिजली-पानी की सप्लाई केसाथ सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट और अन्य चीजें होनी थी।
शहर की जनता को चाहिए इन 6 सवालों के जवाब
1. 6 महीने की मेहनत बेकार
स्मार्ट सिटी पर 6 महीने तक की कसरत का आखिर क्या नतीजा निकला। लाखों लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया और जरूरी सुझाव दिए। स्मार्ट सिटी प्रस्ताव केलिए लोगों की भागीदारी भी काम नहीं आई
2. स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों का हाउस टैक्स क्यों वसूला
शहरवासियों पर हाउस टैक्स का भार भी स्मार्ट सिटी बनाने केनाम पर ही डाला गया था। लोग अभी तक करोड़ों रुपये अदा भी कर चुके हैं। प्रशासन ने पिछले साल 5 मरले और उससे ऊपर केहर मकान पर हाउस टैक्स लगाया था।
3. प्रधानमंत्री की सिर्फ घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी बनाए जाने की घोषणा कर चुके हैं। फ्रांस राष्ट्रपति ओलांद के दौरे ने उम्मीदें और बढ़ा दी थीं। लेकिन चंडीगढ़ का नाम लिस्ट में नहीं आना अपने आप में सवाल बन गया है।
4. स्मार्ट सिटी का एमओयू किस काम का
फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में फ्रांस एजेंसी ऑफ डी डेवलपमेंट (एफएडी) और यूटी प्रशासन के बीच स्मार्ट सिटी एमओयू साइन हो चुका है। एमओयू के बाद भी चंडीगढ़ का सूची से बाहर हो जाना किसी केगले नहीं उतर रहा।
5. 2 करोड़ का बजट भी जाया
स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव तैयार करने केलिए प्रशासन को 2 करोड़ रुपये की ग्रांट मिली थी। यह पैसा प्रस्ताव तैयार करने और लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर खर्च हो चुका है। लोगों की गाढ़ी कमाई जाया चली गई।
6. भागीदारी भी नहीं आई काम
शहरी विकास मंत्रालय ने लोगों की भागीदारी में चंडीगढ़ को दूसरे स्थान पर रखा था। भोपाल केबाद चंडीगढ़ सभी गतिविधियों में आगे था। लोगों की भागीदारी और समय पर प्रस्ताव जमा करवाने केआधार पर ही स्मार्ट शहरों केनाम तय होने थे।
कैसे हुआ शहरों का चयन
स्मार्ट सिटी केलिए शहरों को कई मानकों पर परखा गया। इसमें शहरी सुधार के अलावा स्वच्छता, मेक इन इंडिया, जनता अनुकूल शासन, बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट, तर्कसंगत प्रॉपर्टी टैक्स और ई-प्रशासन के लिए उनकी कार्ययोजना को भी देखा गया। प्रतिभागी शहरों को शहर बेहतर बनाने, पुनर्विकास और उसकेविस्तार के बारे में विचार भी देने थे।
स्मार्ट सिटी प्रपोजल पर इतने लोगों का साथ गया बेकार
- मायगोव पोर्टल से 20 हजार लोगों का फीडबैक।
- 56480 फेसबुक लाइक्स।
- 264 ट्वीट्स और 1083 फॉलोअर्स
- यू ट्यूब पर 407 व्यू
- विजन और गोल केबारे में 39805 फिजिकल फॉर्म प्राप्त किए
- प्रस्तावित विजन पर 30300 फॉर्म आए
- प्रस्तावित हल पर 29650
- स्मार्ट सिटी वॉक में 1050 लोगों की भागीदारी
- 14 वर्कशॉप, 3657 निबंध एंट्री
- 10 स्मार्ट सिटी पब्लिक कैंप
ऐसे होनी थी एरिया बेस्ड डेवलपमेंट
सिटीजन सेफ्टी: पुलिस कियोस्क और सर्विलांस सिस्टम होगा।
ट्रांसपोर्टेशन: मेट्रो, इंटेलिजेंट ट्रैफिक लाइट्स और मल्टीलेवल पार्किंग।
पेडस्ट्रीयन और नॉन मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट: फुटपाथ और साइक्लिंग की 100 प्रतिशत कवरेज के साथ कार फ्री जोन
आइटी कनेक्टिविटी एंड डिजिटाइजेशन: पब्लिक वाई-फाई हॉटस्पॉट, इंटरेक्टिव कियोस्क
ट्रांजिट ओरिएंटिड डेवलपमेंट: एकोनॉमिक डेवलपमेंट और रोजगार के अवसर
यूटिलिटीज- चौबीसों घंटे पानी, स्मार्ट मीटर्स, स्मार्ट ग्रिड और सोलर से 10 प्रतिशत एनर्जी
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट: डोर टु डोर कलेक्शन ऑफ वेस्ट, साइंटिफिक डिस्पोजल, वेस्ट टु कंपोजिट
विजिबल इंप्रूवमेंट: अंडरग्राउंड वायरिंग, स्ट्रीट फर्नीचर, स्ट्रीट कैफे, ओपन प्लाजा
धरी रह गई मिठाई
स्मार्ट सिटी में नाम नहीं आने के बाद अधिकारी आंसू पोंछते रह गए। कोई इसे राजनीतिक षड़यंत्र बता रहा है तो कोई सफाई देता रह गया। वीरवार सुबह से ही अधिकारी सूची जारी होने का इंतजार कर रहे थे। मिठाई तक ऑफिस में मंगवा कर रखी गई थी। लेकिन सूची जारी होने के बाद सबके होश फाख्ता हो गए।
विजय कुमार देव, एडवाइजर, चंडीगढ़ प्रशासन ने बताया कि स्मार्ट सिटी की दो अलग सूची हैं। एक दूसरी सूची भी है जिसे फास्ट ट्रैक स्मार्ट सिटी अपग्रेडेशन नाम दिया गया है। उसमें चंडीगढ़ का दूसरा स्थान है। यह सूची प्रशासन को मिल गई है। चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए प्रशासन निरंतर अग्रसर है।
अनुराग अग्रवाल, मिशन डायरेक्टर, स्मार्ट सिटी कम गृह सचिव, चंडीगढ़ के अनुसार लोगों की उत्साहपूर्वक भागीदारी और सहयोग के बाद स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव बनाकर शहरी विकास मंत्रालय के पास जमा करवाया गया था। प्रस्ताव पर भारत सरकार से हाई रेटिंग भी मिली थी।
चंडीगढ़ प्रशासन शहर को टॉप सिटी बनाने के लिए प्रतिबद्घ है। इसके लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। अप्रैल-2016 से स्मार्ट सिटी प्रस्ताव को लागू करने के लिए ग्रांट मिलनी शुरू हो जाएगी। भारत सरकार के कैबिनेट सचिव और शहरी विकास मंत्रालय के सचिव के साथ यूटी प्रशासन की शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस भी है।
किरण खेर, सांसद, चंडीगढ़ ने कहा, स्मार्ट सिटी के बारे में आप एडवाइजर से बात करें। इस मामले में प्रशासन और केंद्र सरकार के बीच ही मीटिंग हुई हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर यूटी में सांसद का कोई रोल नहीं है। लेकिन चंडीगढ़ का स्मार्ट सिटी में नाम न होना बहुत दुखदायी है।