पीजीआई के डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन एंड स्कूल ऑफ पब्लिक एंड हेल्थ की प्रो. मधु गुप्ता ने बताया देश के 17 संस्थानों में इसका ट्रायल हो रहा है। पहले फेज में हर संस्थान में 100 पर इसका ट्रायल किया जाएगा। पुणे के इंस्टीट्यूट में 100 वालिंटियर्स पर इसका ट्रायल पूरा हो चुका है।
जिन वॉलिंटियर्स को यह वैक्सीन दी गई है उन्हें इससे कोई नुकसान नहीं हुआ है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि वैक्सीन के नतीजे अच्छे होंगे। डॉ. मधु गुप्ता ने बताया कि यह वैक्सीन सीरम इंस्टीट्यूट की ओर से आत्मनिर्भर मिशन के तहत भारत में ही बनाई जा रही है। इसलिए यह सस्ती होगी और आम आदमी की पहुंच में होगी।
डाटा सेफ्टी एंड मॉनिटरिंग ऑफ बोर्ड करेगा विश्लेषण
जिन लोगों पर इस वैक्सीन का ट्रायल होगा उन वालिंटियर्स का सारा रिकॉर्ड डाटा सेफ्टी एंड मॉनिटरिंग बोर्ड के पास भेजा जा रहा है। बोर्ड इन वॉलिंटियर्स की सेहत को लेकर एनालिसिस करेगा। इसके आधार पर वैक्सीन की सफलता का आकलन किया जाएगा।
ऐसे वालिंटियर्स को किया ट्रायल में शामिल
इसमें 18 साल से ऊपर के वे लोग शामिल किए गए हैं जिन्हें कोरोना नहीं हुआ, न ही परिवार में किसी को हुआ हो। वह पूरी तरह से स्वस्थ हो। ट्रायल के दौरान अगर किसी भी वालिंटियर्स को किसी भी तरह की कोई स्वास्थ्य संबंधित समस्या हुई तो पीजीआई में उनका इलाज किया जाएगा।